सहायता प्राप्त विद्यालयों के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्यों को ग्रेच्युटी पाने का अधिकार: हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
सहायता प्राप्त विद्यालयों के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्यों को ग्रेच्युटी पाने का अधिकार: हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
प्रयागराज, 21 जुलाई । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक आदेश में कहा है कि राजकीय सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में सेवा दे चुके शिक्षक , ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 के तहत ग्रेच्युटी पाने के हकदार हैं।सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य एवं 3 अन्य याचिकाकर्ताओं ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। इनमें से सभी प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं।याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता ने श्रीमती मेहर जहां बनाम उत्तर प्रदेश राज्य केस का हवाला दिया। ऐसे मामले में कोर्ट पहले ही लाभ दे चुकी है। राज्य की ओर से कहा गया कि याचिका बेहद देरी से दाखिल की गई है और इसके लिए कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। इसके जवाब में याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि ग्रेच्युटी से जुड़े मामलों में समय सीमा लागू नहीं होती। यह विधिक अधिकार है, भुगतान होने तक मांग की जा सकती है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने कहा कि अदालत पहले ही यह घोषित कर चुकी है कि सहायता प्राप्त संस्थानों के शिक्षक ग्रेच्युटी अधिनियम के तहत लाभ पाने के हकदार हैं, जिनमें कहा गया है कि सहायता प्राप्त संस्थान को राज्य सरकार के संस्थानों के समकक्ष माना गया है और सेवा में देरी के आधार पर ग्रेच्युटी के दावे को खारिज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने मामले को विचारणीय मानते हुए राज्य सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।