श्रावण मास में आस्था का प्रमुख केंद्र है प्रयागराज स्थित प्राचीन ब्रह्मेश्वर महादेव मंदिर

-ब्रह्मा जी के प्रथम यज्ञ से जुड़ा है इस पवित्र स्थल का इतिहास - दर्शन-पूजन से मिलती है विशेष पुण्यफल की मान्यता

श्रावण मास में आस्था का प्रमुख केंद्र है प्रयागराज स्थित प्राचीन ब्रह्मेश्वर महादेव मंदिर

प्रयागराज, 30 जुलाई । तीर्थराज प्रयाग के दारागंज क्षेत्र में गंगा तट के समीप स्थित प्राचीन ब्रह्मेश्वर महादेव (दशाश्वमेध) मंदिर श्रावण मास में श्रद्धालुओं की विशेष आस्था का केंद्र बना हुआ है। मान्यता है कि इसी स्थान पर सृष्टिकर्ता ब्रह्मा ने अपना प्रथम यज्ञ संपन्न किया था तथा यज्ञ के उपरांत स्वयं भगवान शिव के ब्रह्मेश्वर स्वरूप शिवलिंग की स्थापना की थी। यही कारण है कि इस स्थान को दशाश्वमेध तीर्थ के नाम से भी जाना जाता है।

मंदिर के पुजारी ओम जी महाराज ने बताया कि दारागंज स्थित यह स्थल पुराणों में वर्णित अत्यंत प्राचीन और सिद्ध तीर्थ है। मत्स्य पुराण, पद्म पुराण, शिव पुराण तथा स्कंद पुराण में दशाश्वमेध तीर्थ की महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है। मान्यता है कि जहां ब्रह्मा ने दश अश्वमेध यज्ञ किए, वही स्थान आगे चलकर दशाश्वमेध तीर्थ के रूप में प्रसिद्ध हुआ।

उन्होंने बताया कि पुराणों के अनुसार यहां स्नान, जप, तप, दान, रुद्राभिषेक और भगवान ब्रह्मेश्वर महादेव का पूजन करने से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—इन चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से विजयादशमी तथा श्रावण मास में यहां दर्शन-पूजन का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। पुजारी ओम जी के अनुसार श्रावण भगवान शिव का प्रिय मास माना जाता है। इस पूरे महीने देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु गंगाजल लेकर ब्रह्मेश्वर महादेव का जलाभिषेक करने आते हैं। मान्यता है कि श्रावण में श्रद्धा और विधि-विधान से रुद्राभिषेक, बेलपत्र, धतूरा, भांग, पुष्प और गंगाजल अर्पित करने से भगवान शिव भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं तथा जीवन के कष्टों का निवारण होता है।

उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर के समीप स्थित प्राचीन यज्ञकुंड आज भी इस पवित्र स्थान की ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्ता का साक्षी है। गंगा तट पर स्थित होने के कारण यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान के बाद भगवान ब्रह्मेश्वर महादेव के दर्शन कर पूजा-अर्चना करते हैं। श्रावण मास में प्रातःकाल से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगती हैं। हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहता है। स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ दूर-दराज से आने वाले शिवभक्त भी इस प्राचीन मंदिर में जलाभिषेक कर पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं।

पुजारी ओम जी ने श्रद्धालुओं से श्रावण मास में इस प्राचीन शिवधाम में पहुंचकर भगवान ब्रह्मेश्वर महादेव का दर्शन-पूजन करने तथा तीर्थराज प्रयाग की इस प्राचीन धार्मिक विरासत से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह मंदिर केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि प्रयागराज की प्राचीन आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का जीवंत प्रतीक भी है।