बच्चों एवं किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए प्रशिक्षित काउंसलरों की आवश्यकता पहले से अधिक : प्रो. राज कुमार मित्तल

बच्चों एवं किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए प्रशिक्षित काउंसलरों की आवश्यकता पहले से अधिक : प्रो. राज कुमार मित्तल

बच्चों एवं किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए प्रशिक्षित काउंसलरों की आवश्यकता पहले से अधिक : प्रो. राज कुमार मित्तल

लखनऊ, 28 जुलाई । बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय लखनऊ तथा सावित्रीबाई फुले राष्ट्रीय महिला एवं बाल विकास संस्थान क्षेत्रीय केंद्र लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को एडवांस्ड डिप्लोमा इन चाइल्ड गाइडेंस एंड काउंसलिंग (एडीसीजीसी) का शुभारंभ किया गया। इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य बच्चों एवं किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य, मनोसामाजिक विकास तथा परामर्श सेवाओं के क्षेत्र में दक्ष मानव संसाधन तैयार करना है।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों एवं किशोरों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं, तनाव, व्यवहारगत चुनौतियों, भावनात्मक अस्थिरता तथा सामाजिक दबावों में निरंतर वृद्धि देखने को मिल रही है। बदलती जीवनशैली, डिजिटल तकनीक का बढ़ता प्रभाव, शैक्षणिक प्रतिस्पर्धा तथा पारिवारिक एवं सामाजिक परिवेश में हो रहे बदलावों के कारण बच्चों के समग्र विकास पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे समय में प्रशिक्षित चाइल्ड गाइडेंस एवं काउंसलिंग विशेषज्ञों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है, जो बच्चों की मनोवैज्ञानिक एवं भावनात्मक आवश्यकताओं को समझते हुए उन्हें समय पर उचित मार्गदर्शन और परामर्श प्रदान कर सकें। उन्होंने कहा कि बच्चों का मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य एक सशक्त समाज और विकसित राष्ट्र की आधारशिला है। इस उद्देश्य की पूर्ति में शिक्षा संस्थानों, स्वास्थ्य सेवाओं, अभिभावकों तथा समाज की समान रूप से महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रो. मित्तल ने बताया कि बीबीएयू द्वारा प्रारंभ किया गया यह एडवांस्ड डिप्लोमा कार्यक्रम शिक्षा, स्वास्थ्य, मनोविज्ञान एवं बाल संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत पेशेवरों के लिए नई संभावनाएँ उपलब्ध कराएगा।

डीन अकादमिक प्रो. एस. विक्टर बाबू ने कहा कि बच्चों के समग्र विकास के लिए शिक्षा, मनोविज्ञान, स्वास्थ्य एवं सामाजिक कार्य के बीच समन्वित दृष्टिकोण आवश्यक है। उन्होंने इस संयुक्त पहल की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह कार्यक्रम देश में गुणवत्तापूर्ण बाल परामर्श सेवाओं को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

मुख्य वक्ता डॉ. पी. के. श्रीवास्तव, अधीक्षक, बलरामपुर चिकित्सालय, लखनऊ ने कहा कि भारत में बाल एवं किशोर मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए प्रशिक्षित काउंसलरों की अत्यंत आवश्यकता है। उन्होंने स्वास्थ्य एवं शैक्षणिक संस्थानों के बीच समन्वित प्रयासों पर बल देते हुए कहा कि समय पर परामर्श एवं मनोसामाजिक सहयोग बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की डॉ. अनिल वी. बी. बाबू, क्षेत्रीय निदेशक, सावित्रीबाई फुले राष्ट्रीय महिला एवं बाल विकास संस्थान, क्षेत्रीय केंद्र, लखनऊ ने कहा कि यह डिप्लोमा कार्यक्रम बाल मानसिक स्वास्थ्य, बाल संरक्षण एवं पारिवारिक परामर्श सेवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने बताया कि इस पाठ्यक्रम के माध्यम से ऐसे प्रशिक्षित पेशेवर तैयार किए जाएंगे, जो विद्यालयों, चिकित्सालयों, पुनर्वास केंद्रों, बाल संरक्षण संस्थाओं तथा सामुदायिक संगठनों में प्रभावी सेवाएं प्रदान कर सकें।

गृह विज्ञान विद्यापीठ की संकायाध्यक्ष प्रो. यू. वी. किरण ने बच्चों एवं किशोरों में बढ़ती मनोवैज्ञानिक एवं व्यवहारगत चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समय पर पहचान, वैज्ञानिक परामर्श तथा परिवार आधारित हस्तक्षेप बच्चों के स्वस्थ एवं संतुलित विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

कार्यक्रम की नोडल अधिकारी एवं मानव विकास एवं पारिवारिक अध्ययन विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. शालिनी अग्रवाल ने पाठ्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इसमें सैद्धांतिक अध्ययन के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण, पर्यवेक्षित फील्ड वर्क, केस स्टडी तथा इंटर्नशिप को विशेष महत्व दिया गया है, जिससे विद्यार्थियों को वास्तविक परिस्थितियों में कार्य करने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा।