प्रयागराज कचहरी में 46 वर्ष पूर्व हुई हत्या में दाेषी पूर्व विधायक विजय मिश्रा समेत चार को उम्रकैद

प्रयागराज कचहरी में 46 वर्ष पूर्व हुई हत्या में दाेषी पूर्व विधायक विजय मिश्रा समेत चार को उम्रकैद

प्रयागराज कचहरी में 46 वर्ष पूर्व हुई हत्या में दाेषी पूर्व विधायक विजय मिश्रा समेत चार को उम्रकैद

प्रयागराज, 13 मई । प्रयागराज की एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट से बाहुबली पूर्व विधायक विजय मिश्रा को आज बड़ा झटका लगा है। एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट ने 46 साल पुराने हत्या के मामले में बाहुबली पूर्व विधायक विजय मिश्रा को उम्र कैद की सजा सुनाई है। एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट ने इसी मामले में मुलजिम तीन अन्य दोषियों जीत नारायण मिश्रा, संतराम मिश्रा और बलराम मिश्रा को भी सजा का ऐलान किया है। कोर्ट ने विजय मिश्रा समेत चारों आरोपितों को आईपीसी धारा-302 में कठोर आजीवन कारावास और और एक-एक लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। जबकि आईपीसी की धारा-307 में 10-10 साल की कैद की सजा सुनाई है।

दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी इसलिए जो अधिकतम सजा है उम्र कैद की वही सजा मानी जाएगी। एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट के जज योगेश कुमार तृतीय ने सजा का खुली कोर्ट में निर्णय सुनाया। एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट ने चारों आरोपितों को मंगलवार को दोषी करार दिया था और सजा बुधवार काे सुनायी।

मामला है, 11 फरवरी 1980 को कचहरी परिसर में 35 वर्षीय प्रकाश नारायण पांडेय की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यूनिवर्सिटी छात्र प्रकाश नारायण पांडेय अपने खिलाफ दर्ज मुकदमे में जमानत कराने जिला कोर्ट आए थे। संतराम और बलराम से प्रकाश नारायण पांडेय की दुश्मनी थी। आरोप है कि संतराम, बलराम, विजय मिश्रा और जीत नारायण ने मिलकर गोली मारकर प्रकाश नारायण पांडेय की हत्या कर दी थी। गोलीबारी में पांच अन्य लोगों को भी गोली लगी थी। जिस दिन गोली मारी गई थी उसी दिन प्रकाश नारायण पांडेय का जन्मदिन भी था। हथिगवां नवाबगंज निवासी मृतक के बड़े भाई श्याम नारायण पांडेय ने कर्नलगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। मृतक के बड़े भाई श्याम नारायण पांडेय ने कर्नलगंज थाने में हत्या की एफआईआर दर्ज कराई थी।

विजय मिश्रा जहां पहले से ही आगरा जेल में बंद है। वहीं तीनों अन्य आरोपित जमानत पर थे जिन्हें कल कोर्ट ने दोषी करार दिए जाने के बाद हिरासत में लेकर जेल भेज दिया था। फैसला सुनाए जाने के लिए कड़ी सुरक्षा में बाहुबली विजय मिश्रा को कचहरी परिसर में लाया गया था। फैसला सुनाए जाने के चलते कचहरी की सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी। एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट के बाहर भी भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया था। कोर्ट में सजा का ऐलान होते ही बाहुबली पूर्व विधायक विजय मिश्रा अवाक रह गये। सजा का ऐलान होते वक्त विजय मिश्रा की पत्नी रामलली मिश्रा और बेटी अधिवक्ता रीमा मिश्रा भी मौजूद थी।

एडीजीसी क्रिमिनल सुशील कुमार वैश्य के मुताबिक इस हाई प्रोफाइल मामले में लंबे समय तक इलाहाबाद हाईकोर्ट का स्थगन आदेश था। इसके बाद मामले की पत्रावली गायब कर दी गई थी। ताकि आरोपितों को सजा न हो सके। हालांकि बाद में जीसी क्रिमिनल गुलाबचंद अग्रहरि के कार्यकाल में वर्ष 2024 में दोबारा पत्रावली तैयार की गई और मुकदमे में गवाही शुरू कराई गई। इस मामले में अभियोजन की ओर से एडीजीसी क्रिमिनल सुशील कुमार वैश्य और विशेष लोक अभियोजक वीरेंद्र कुमार सिंह ने मजबूत पैरवी की। तो वहीं बचाव पक्ष में विजय मिश्रा की ओर से अधिवक्ता ताराचंद्र गुप्ता और अन्य अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा था।

इस मामले की पहली गवाही एमपी-एमएलए स्पेशल रिपोर्ट के जज डॉ दिनेश चंद्र शुक्ला की समक्ष हुई थी। वहीं इस मामले में उम्र कैद की सजा के बाद अब विजय मिश्रा व तीन अन्य दोषियों के पास इलाहाबाद हाईकोर्ट में क्रिमिनल अपील दाखिल करने का विकल्प मौजूद है। फिलहाल विजय मिश्रा के परिजनों ने हाईकोर्ट में एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट के फैसले के खिलाफ क्रिमिनल अपील दाखिल करने की बात कही है।