हिंदी केवल संपर्क और जनभाषा ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक विरासत की संवाहक :नरेश पाल सिंह
हिंदी केवल संपर्क और जनभाषा ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक विरासत की संवाहक :नरेश पाल सिंह
उत्तर मध्य रेलवे मुख्यालय में राजभाषा पखवाड़ा शुरू, महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह ने अधिकारियों को दिए निर्देश
प्रयागराज, 14 सितंबर (हि.स.) हिंदी केवल संपर्क और जनभाषा ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक विरासत की संवाहक भी रही है। सरकारी कामकाज में हिंदी के प्रयोग को बढ़ाना हमारा संवैधानिक, नैतिक और राष्ट्रीय दायित्व है।
यह विचार सोमवार को हिंदी दिवस के मौके पर उत्तर मध्य रेलवे मुख्यालय में राजभाषा पखवाड़े का शुभारंभ के अवसर पर उमरे के महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह ने कहा। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से अधिकाधिक काम हिंदी में करने तथा राजभाषा के प्रयोग को नए और रचनात्मक प्रयासों से बढ़ाने का आह्वान किया। हिंदी दिवस के अवसर पर उत्तर मध्य रेलवे मुख्यालय में राजभाषा पखवाड़े का शुभारंभ किया गया। महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलित कर पखवाड़े का उद्घाटन किया। उनकी अध्यक्षता में क्षेत्रीय राजभाषा कार्यान्वयन समिति की बैठक भी हुई।
महाप्रबंधक ने कहा कि वर्ष 1949 में 14 सितंबर को संविधान सभा ने हिंदी को संघ सरकार की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। उन्होंने कहा कि उत्तर मध्य रेलवे का कार्यक्षेत्र पूरी तरह हिंदी भाषी क्षेत्र में है। ऐसे में सरकारी कामकाज में हिंदी के प्रयोग और प्रसार की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
उन्होंने निर्देश दिए कि राजभाषा अधिनियम की धारा 3(3), पत्राचार, टिप्पणियों, विभागीय बैठकों की कार्यवाही और निरीक्षण रिपोर्टों में निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप हिंदी का प्रयोग सुनिश्चित किया जाए। सभी संरक्षा और कार्य संबंधी निर्देश हिंदी-अंग्रेजी द्विभाषी अथवा हिंदी में जारी किए जाएं। इनकी भाषा सरल, स्पष्ट और आसानी से समझ आने वाली हो।
यात्री सुविधाओं में भी हिंदी का प्रयोग जरूरी
नरेश पाल सिंह ने कहा कि रेलवे में यात्रियों और ग्राहकों को बेहतर सेवा देना सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसलिए स्टेशनों और अन्य यात्री सेवा केंद्रों पर सूचनाएं, संकेतक, इलेक्ट्रॉनिक संदेश, नाम-पदनाम पट्टिकाएं और रसीदें हिंदी-अंग्रेजी में उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने इन व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी के निर्देश भी दिए।
पेपरलेस कामकाज की दिशा में रेलवे में दस्तावेजों को डिजिटल रूप दिया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से हिंदी टंकण का आवश्यक ज्ञान प्राप्त कर अधिकाधिक काम हिंदी में करने को कहा। कार्यक्रम के प्रारंभ में महाप्रबंधक ने मुख्यालय की त्रैमासिक राजभाषा पत्रिका ‘रेल संगम’ के झांसी मंडल विशेषांक का विमोचन किया। इसके बाद वैगन मरम्मत कारखाना, झांसी के मुख्य कारखाना प्रबंधक अजय श्रीवास्तव ने कारखाने से संबंधित विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। इसकी अधिकारियों ने सराहना की।
मुख्य राजभाषा अधिकारी एवं वरिष्ठ उप महाप्रबंधक विनीत कुमार श्रीवास्तव ने राजभाषा के प्रयोग-प्रसार के लिए किए गए कार्यों और उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने पखवाड़े के दौरान होने वाले कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए सभी से सक्रिय सहभागिता का अनुरोध किया।
जनसंपर्क अधिकारी ने कहा—हिंदी में कामकाज को मिलेगा बढ़ावा
उत्तर मध्य रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी अमित मालवीय ने कहा कि राजभाषा पखवाड़ा केवल औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि रेलवे के दैनिक कामकाज में हिंदी के सहज और प्रभावी प्रयोग को बढ़ाने का अवसर है। उत्तर मध्य रेलवे में कार्यालयी कार्य, यात्री सुविधाओं और डिजिटल सेवाओं में सरल हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे कर्मचारियों के साथ यात्रियों और आम लोगों के लिए रेलवे की सूचनाओं को समझना और भी आसान होगा।
कार्यक्रम में सभी प्रधान विभागाध्यक्ष, मंडलों के अपर मंडल रेल प्रबंधक, कारखानों के मुख्य कारखाना प्रबंधक, वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी यथार्थ पाण्डेय ने संचालन किया। उप मुख्य राजभाषा अधिकारी एवं उप वित्त सलाहकार एवं मुख्य लेखा अधिकारी एवं भंडार डॉ. गरिमा त्रिपाठी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।