कैकेयी के दो वरदानों से अयोध्या में मचा कोहराम, राम वनगमन की लीला ने दर्शकों को किया भावुक

ड्रमंडगंज रामलीला के आठवें दिन हुआ मंचन, राम के साथ सीता और लक्ष्मण भी वन को चले

कैकेयी के दो वरदानों से अयोध्या में मचा कोहराम, राम वनगमन की लीला ने दर्शकों को किया भावुक

मीरजापुर, 14 अक्टूबर । उत्तर प्रदेश के जनपद मीरजापुर के ड्रमंडगंज बाजार में रामलीला कमेटी की ओर से आयोजित रामलीला के आठवें दिन मंगलवार रात राम वनगमन की लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों के सजीव अभिनय ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

रामलीला शुरू होने से पहले कमेटी के अध्यक्ष आशीष गुप्ता ने पदाधिकारियों के साथ भगवान श्रीराम और माता सीता की आरती उतारी। इसके बाद लीला का मंचन शुरू हुआ। अयोध्या के राजा दशरथ गुरु वशिष्ठ के परामर्श से श्रीराम के राजतिलक की तैयारी कर रहे थे। इसी बीच दासी मंथरा ने रानी कैकेयी के मन में दुर्भावना भर दी। कैकेयी ने राजा दशरथ से अपने दो वरदान मांगते हुए भरत को अयोध्या का राजा बनाने और श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास देने की मांग रख दी।

कैकेयी की मांग सुनकर राजा दशरथ शोक में डूब गए। जब श्रीराम को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने माता-पिता के वचन का पालन करते हुए वन जाने का निर्णय लिया। लक्ष्मण भी उनके साथ जाने की जिद करने लगे। अंततः श्रीराम उन्हें साथ ले जाने के लिए तैयार हो गए। माता सीता भी पति के साथ वन के लिए प्रस्थान कर गईं। राम वनगमन के प्रसंग ने दर्शकों को भावुक कर दिया। कथा व्यास शिवदास दुबे के निर्देशन में हुई प्रस्तुति के दौरान समाजसेवी धीरज मिश्र, मंगलदास जायसवाल, सोनू सिंह, सच्चिदानंद केशरी और मनीष सोनी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।