एक युवा साेच ने बना दी वीर शिवाजी अकादमी, बिना पैसे लिये हाकी को दिये 52 से ज्यादा होनहार खिलाड़ी

एक युवा साेच ने बना दी वीर शिवाजी अकादमी, बिना पैसे लिये हाकी को दिये 52 से ज्यादा होनहार खिलाड़ी

एक युवा साेच ने बना दी वीर शिवाजी अकादमी, बिना पैसे लिये हाकी को दिये 52 से ज्यादा होनहार खिलाड़ी

लखनऊ, 13 अक्टूबर । खेलो इंडिया की विभिन्न प्रतियाेगिताओं के बीच उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बिना किसी शोरशराबे के एक युवा जमीनी स्तर पर हाकी के खिलाड़ियों की नर्सरी तैयार कर रहा है। अपने सीमित संसाधनों के सहारे ऐसे बच्चों को हाकी का प्लेयर बनाया जा रहा है, जिनके परिवारों में किसी ने ऐसे खेल के बारे में सुना भी नहीं और उनके खाने-पीने तक का इंतजाम नहीं है। इसका सुखद पहलू यह है कि अब इसी नर्सरी से निकले हाकी प्लेयर कई खेल छात्रावास, अकादमियों और खेल कॉलेजों में अपनी जगह बनाने में कामयाब हो गये हैं और सिलसिला जारी है। यह उपलब्धि तब है कि इन बच्चों से किसी भी प्रकार की फीस नहीं ली जाती है।

यह पहल की है राजधानी लखनऊ के एक होनहार युवा सामाजिक कार्यकर्ता गौरव अवस्थी ने। कभी खुद एक खेल अकादमी से जुडे़ थे लेकिन उनके दिल में जिस वर्ग के बच्चों के लिए काम करने की ललक थी, वह वहां पर पूरी नहीं कर पा रहे थे। ऐसे में उन्होंने खुद नया रास्ता चुना। पास में इतना पैसा नहीं था और न ही संपर्क लेकिन जुनून की कमी नहीं थी और इसी जुनून ने उन्हें आगे का रास्ता दिखाया था। उन्होंने सबसे पहले शिवाजी हाकी अकादमी बनायी। इसके बाद अपने शुभचिंतकाें के साथ लखनऊ के विभिन्न मोहल्लों व पार्कों में जाकर बच्चों की तलाश शुरु की और उनकी प्रतिभा पहचानी। इसके बाद एक-एक कर बच्चे के परिवार वालों से मिले और उन्हें खेल का महत्व भी समझाया। यही सबसे बड़ी चुनौती थी कि इन बच्चों के परिवारों को समझा कर अपनी अकादमी से जोड़ना। वजह यह भी कि इनमें से कई बच्चे सड़क पर कूड़ा बीनकर अपने परिवार के लिए सहारा थे लेकिन गौरव अवस्थी ने एक अभिभावक की तरह परिवारों को भी समझाया और बच्चों को भी खेल के लिए प्रोत्साहित किया। कई बार ऐसे परिवाराें की मदद भी की।



गौरव अवस्थी बताते हैं कि लगातार मेहनत करने से वीर शिवाजी हॉकी अकादमी की गतिविधियां धीरे-धीरे गति पकड़ने लगी और बच्चों की संख्या भी बढ़ने लगी। कोच इन बच्चों को तराशने में जुट गए। हालांकि प्रशिक्षण में भी कई बार तरह-तरह की बाधाएं आयीं और एक बार ताे खेल प्रशिक्षण भी प्रभावित होने की नौबत आयी लेकिन गौरव अवस्थी के इरादे पक्के थे। सो उन्होंने इन बाधाओं को पार कर लिया। वे बताते हैं कि सबसे बड़ी समस्या खेल मैदान की रही। उन्होंने बताया कि सरकारी खेल मैदान पर आसानी से प्रैक्टिस कराते थे लेकिन जब ऐसे खेल मैदानों को पीपीपी मोड में संचालित करने के लिए निजी क्षेत्र को दे दिया गया तो बच्चों के सामने प्रैक्टिस करने की समस्या आ गयी। ऐसे में उन्होंने निजी क्षेत्र के ही पार्कों और खेल मैदानों को चुना।

लगभग एक दशक की मेहनत के बाद पिछले साल 2025 में वीर शिवाजी हॉकी अकादमी भारतीय हाकी एसोसिएशन से संबद्धता प्राप्त करने में सफल हो गयी है। इसी अकादमी में मिले खेल कौशल से वीर शिवाजी हॉकी अकादमी के कम-से-कम आधा दर्जन खिलाड़ी इस बार विभिन्न संस्थानों में चयनित हुए हैं। गौरव अवस्थी ने बताया कि इनमें सबल सिंह का चयन स्पोर्ट्स कॉलेज सहारनपुर में हुआ है जबकि विक्रमेंद्र सिंह का साई सेंटर, बरेली, प्रिंस चौधरी का स्पोर्ट्स कॉलेज, फतेहपुर, सौरभ भारती का स्पोर्ट्स हॉस्टल, झांसी, कार्तिकेय द्विवेदी का स्टेट स्पोर्ट्स हॉस्टल, रामपुर और धनंजय का स्पोर्ट्स हॉस्टल, वाराणसी (बनारस) में चयन हुआ है। अब तक कुल 52 खिलाडियों को विभिन्न छात्रावासों, खेल संस्थानों में चयन हो चुका है।



नवंबर में होगा हनुमान कप का पांचवा संस्करण

वीर शिवाजी हॉकी अकादमी हाकी खेल को लोकप्रिय बनाने, नए-नए खिलाड़ियों को तैयार करने, खिलाड़ियों को हरसंभव मदद करने के लिए हनुमान टूर्नामेंट का आयोजन करती है। अब तक चार बड़े आयोजन किए जा चुके हैं; इस बार पांचवां संस्करण हनुमान कप के नाम से नवंबर में आयोजित किया जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खेलो इंडिया से प्रभावित गौरव अवस्थी बताते हैं कि उनके समक्ष सबसे चुनौती खेल मैदान की उपलब्धता को लेकर है। मैदान की कमी के कारण और खिलाड़ियों को प्रशिक्षण नहीं दे पा रहे हैं। रही आर्थिक मदद की तो दो साल पहले राज्य सरकार की ओर से सहायता मिली थी लेकिन फिलहाल अपने साधनों से हाकी खेल की प्रतिभाएं तराशने में व्यस्त हैं। उनका कहना है कि आठ से दस साल के बच्चों को कम-से-कम चार साल तराशना पड़ता है, तब कहीं जाकर उसे आगे बढ़ने का मौका मिलता है और वह खुद भी प्रेरित होता है। बहरहाल, गाैरव अवस्थी की सकारात्मक साेच से हर साल हाकी के नए खिलाड़ी तैयार हाे रहे हैं।