एलएचबी कोचों में अब 20 गुना अधिक कचरा जमा होगा, झांसी वर्कशॉप ने तैयार किया नया डस्टबिन सिस्टम

18 लीटर से बढ़कर 367.4 लीटर हुई क्षमता, लंबी यात्रा में बार-बार डस्टबिन खाली करने की जरूरत नहीं

एलएचबी कोचों में अब 20 गुना अधिक कचरा जमा होगा, झांसी वर्कशॉप ने तैयार किया नया डस्टबिन सिस्टम

प्रयागराज, 03 सितंबर। रेल यात्रा के दौरान कोचों में स्वच्छता बनाए रखने और रेल पटरियों पर कचरा जाने से रोकने के लिए उत्तर मध्य रेलवे के झांसी कारखाने ने महत्वपूर्ण पहल की है। झांसी वर्कशॉप ने एलएचबी कोचों के लिए अधिक क्षमता वाली संशोधित कचरा निपटान प्रणाली का प्रोटोटाइप तैयार किया है। नई व्यवस्था से कचरा रखने की क्षमता करीब 20 गुना बढ़कर 367.4 लीटर हो गई है। इससे लंबी दूरी की यात्रा के दौरान डस्टबिन के बार-बार भरने और कचरा फैलने की समस्या से राहत मिलेगी।

18 लीटर से बढ़कर 367.4 लीटर क्षमता

वर्तमान में एलएचबी कोचों के केबिन में दो डस्टबिन लगाए जाते हैं, जिनकी कुल क्षमता करीब 15 से 20 लीटर होती है। लंबी दूरी की ट्रेनों में यात्रियों की संख्या अधिक होने के कारण ये डस्टबिन जल्दी भर जाते हैं। इससे कोच में कचरा फैलने के साथ दुर्गंध की समस्या भी पैदा होती है। कई बार कचरा ट्रैक पर भी पहुंच जाता है। इस समस्या को देखते हुए झांसी कारखाने ने नई कचरा निपटान प्रणाली विकसित की है। इसमें कचरा रखने की क्षमता 18 लीटर से बढ़ाकर 367.4 लीटर कर दी गई है।

तीन हिस्सों से बनी नई व्यवस्था

नई प्रणाली में तीन प्रमुख हिस्से हैं। पहला गारबेज ड्रॉप बॉक्स है, जिसे यात्रियों की सुविधा के लिए कोच के फर्श पर सुरक्षित रूप से लगाया गया है। दूसरा सेंट्रल कनेक्टर है, जो केबिन के फर्श और कोच के निचले हिस्से के बीच जुड़कर कचरे को नीचे पहुंचाता है। तीसरा गारबेज कलेक्टर है, जिसे ट्रेन के निचले ढांचे में स्टेनलेस स्टील के संग्रह टैंक के रूप में लगाया गया है।

यह पूरी व्यवस्था गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत पर काम करती है। यात्री जैसे ही ड्रॉप बॉक्स में कचरा डालेंगे, वह सीधे नीचे लगे संग्रह टैंक में पहुंच जाएगा। इससे केबिन में कचरा जमा होने और दुर्गंध फैलने की संभावना कम होगी।

सफाई और कचरा निकालना होगा आसान

संग्रह टैंक में विशेष 3:10 टेपर डिजाइन दिया गया है। इससे ट्रेन के गंतव्य या संबंधित डिपो पर टैंक से कचरा तेजी से और आसानी से निकाला जा सकेगा। ड्रॉप बॉक्स और संग्रह टैंक दोनों की दो तरफ से धुलाई और सैनिटाइजेशन की सुविधा भी रखी गई है।

नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा लंबी दूरी की ट्रेनों में मिलेगा। डस्टबिन जल्दी नहीं भरेंगे और उन्हें बार-बार खाली करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। साथ ही कचरा पटरियों पर गिरने की समस्या कम होने से रेलवे परिसरों और रेल मार्गों को स्वच्छ रखने में मदद मिलेगी।

आरडीएसओ को भेजा गया प्रोटोटाइप

झांसी कारखाने ने इस नई प्रणाली को एक एलएचबी कोच में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया है। अब इसे औपचारिक निरीक्षण के लिए अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) को प्रस्तुत किया गया है। आरडीएसओ के निरीक्षण और सुझावों के बाद इस व्यवस्था को भारतीय रेल के एलएचबी कोचों में व्यापक स्तर पर लागू करने की योजना है।

यात्रियों और रेलवे दोनों को होगा लाभ : पीआरओ

उत्तर मध्य रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी अमित मालवीय ने बताया कि झांसी कारखाने की ओर से तैयार की गई यह व्यवस्था यात्रियों की सुविधा के साथ रेल कोच और पटरियों की स्वच्छता बनाए रखने में उपयोगी साबित होगी। उन्होंने कहा कि नई प्रणाली में कचरा सीधे कोच के नीचे बने बड़े संग्रह टैंक में पहुंचता है। इससे डिब्बे में कचरा जमा होने और यात्रा के दौरान बार-बार डस्टबिन खाली करने की आवश्यकता कम होगी। प्रोटोटाइप को आरडीएसओ के निरीक्षण के लिए भेजा गया है। आवश्यक परीक्षण और सुझावों के बाद इसके व्यापक उपयोग की दिशा में आगे की कार्रवाई की जाएगी।