कन्नौज दहेज हत्या केस में हाईकोर्ट सख्त, जिला जज और SP से मांगी रिपोर्ट
गैर-जमानती वारंट तामील न होने पर उठे सवाल, दो दरोगाओं पर कार्रवाई और कोर्ट कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच की मांगी जानकारी
प्रयागराज, 08 अक्टूबर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कन्नौज के तिर्वा थाना क्षेत्र के 2008 के दहेज हत्या मामले में गैर-जमानती वारंट तामील न होने पर गंभीर रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने आरोपी राजेश की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए कन्नौज के जिला जज और पुलिस अधीक्षक (एसपी) से रिपोर्ट तलब की है। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी।
राजेश के खिलाफ परिवाद में आईपीसी की धारा 498ए, 304बी, 201 और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत मुकदमा चल रहा है। एफआईआर 3 जून 2008 को दर्ज हुई थी। पुलिस ने 26 दिसंबर 2008 को फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी, जिसके खिलाफ वादी ने प्रोटेस्ट पेटिशन दाखिल की। इसे परिवाद के रूप में दर्ज किया गया और 7 अप्रैल 2014 को राजेश व अन्य सह-अभियुक्तों को सम्मन किया गया। बचाव पक्ष ने दलील दी कि राजेश को कभी कोई सम्मन या वारंट नहीं मिला और उसे मुकदमे की जानकारी नहीं थी। जानकारी मिलते ही उसने हाई कोर्ट में धारा 528 बीएनएसएस के तहत याचिका दाखिल की। 21 मई 2026 को इसका निस्तारण करते हुए हाई कोर्ट ने तीन सप्ताह में निचली अदालत में हाजिर होने को कहा था और सतेन्दर कुमार अंतिल बनाम सीबीआई (2021) के आधार पर जमानत पर विचार का निर्देश दिया था।
बचाव पक्ष ने सह-अभियुक्त रामअवतार और रामबेटी को 13 अगस्त 2026 को मिली जमानत के आदेश का हवाला दिया। उस मामले में एसपी कन्नौज के हलफनामे में कहा गया था कि पुलिस को 30 जनवरी 2016 को कोई एन बी डब्ल्यू प्राप्त ही नहीं हुआ। इसके बाद जिला जज की 5 अगस्त 2026 की रिपोर्ट में सामने आया कि:
30 जनवरी 2016 से 23 मार्च 2022 के बीच वारंट जारी होना प्रतीत होता है, लेकिन उन्हें थाने या संबंधित पैरोकार को सौंपा ही नहीं गया।
24 मार्च 2022 को जारी गैर जमानती वारंट 25 मार्च को थाने पहुंचा, पर उप निरीक्षक पंकज यादव ने 14 अप्रैल 2022 को यह लिखकर लौटा दिया कि आरोपी घर पर नहीं मिले। 12 अगस्त 2025 को जारी गैर जमानती वारंट उप निरीक्षक राजेंद्र सिंह ने 16 सितंबर 2025 को लौटाया। रिपोर्ट में दबिश का हवाला दिया गया, पर आरोपी नहीं मिले।2016 से 2022 तक वारंट न भेजने के लिए सीजेएम कोर्ट के लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई थी।
हाईकोर्ट ने एसपी को दोनों उप निरीक्षकों पर उचित कार्रवाई के निर्देश भी दिए थे।
न्यायालय ने कहा कि सह-अभियुक्तों की जमानत का निस्तारण हो चुका है, इसलिए उसे कोर्ट कर्मचारियों और दोनों उप निरीक्षकों के खिलाफ जांच के नतीजे की जानकारी नहीं है। इसी कारण कोर्ट ने ये आदेश दिए:
13 अगस्त 2026 के आदेश के बाद सीजेएम कोर्ट के कर्मचारियों के खिलाफ कोई विभागीय कार्यवाही शुरू हुई या अन्य कार्रवाई हुई या नहीं, इसकी रिपोर्ट दें।
उप निरीक्षक पंकज यादव और राजेंद्र सिंह के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई, इसकी रिपोर्ट दें। साथ ही यह भी बताएं कि राजेश के खिलाफ जारी किसी वारंट या गैर जमानती वारंट की तामील पुलिस ने की या नहीं।
रजिस्ट्रार (अनुपालन) को आदेश की प्रति जिला जज और एसपी कन्नौज को भेजने का निर्देश दिया गया है। मामला 15 अक्टूबर 2026 को नए सिरे से सूचीबद्ध होगा।