कुंभ से पहले पुलिसकर्मियों की खास ट्रेनिंग, भीड़ नियंत्रण से श्रद्धालु सुरक्षा तक सिखाए गए जरूरी गुर
हरिद्वार सशस्त्र पुलिस प्रशिक्षण केंद्र में छह दिवसीय प्रशिक्षण का सातवां चरण, कुंभ-अर्द्धकुंभ के अनुभवों से आपदा प्रबंधन और त्वरित निर्णय की तैयारी
हरिद्वार, 15 सितंबर । सशस्त्र पुलिस प्रशिक्षण केन्द्र हरिद्वार में कुंभ मेला की तैयारियों के तहत आयोजित छह दिवसीय सप्तम चरण के प्रशिक्षण में पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मेला व्यवस्थाओं, भीड़ नियंत्रण और श्रद्धालुओं की सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।
प्रशिक्षण में इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी उत्तराखंड के चेयरमैन डॉ. नरेश चौधरी ने पुलिस प्रशिक्षु कार्मिकों को प्रशिक्षण दिया। डॉ. नरेश चौधरी ने अपने करीब चार दशकों के कुंभ, अर्द्धकुंभ, कांवड़ मेला और प्रमुख स्नान पर्वों के अनुभव पुलिसकर्मियों के साथ साझा किए। उन्होंने हरिद्वार कुंभ मेले के इतिहास, साधु-संतों और अखाड़ों की परंपराओं तथा प्रमुख स्नान पर्वों के दौरान स्थानीय नागरिकों, श्रद्धालुओं और यात्रियों की भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने विशेष रूप से भीड़ नियंत्रण और आपदा प्रबंधन से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं पर जोर दिया। पूर्व में आयोजित कुंभ और अर्द्धकुंभ मेलों के दौरान सामने आई प्रमुख घटनाओं का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि ऐसी घटनाओं के बाद जांच आयोगों की रिपोर्ट, प्रशासनिक अनुभवों और जनमानस से मिले सुझावों के आधार पर मेला व्यवस्थाओं में लगातार सुधार किए गए हैं।
पूर्व की घटनाओं से सीख लेते हुए कुंभ की तैयारियों में विभिन्न विभागों, संस्थाओं, साधु-संतों, अखाड़ों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर काम किया जा रहा है। डॉ. चौधरी ने हरिद्वार के अलावा उज्जैन, नासिक और प्रयागराज में आयोजित कुंभ मेलों की व्यवस्थाओं एवं घटनाओं का तुलनात्मक विवरण देते हुए बताया कि कुंभ और अर्द्धकुंभ की दृष्टि से हरिद्वार की अवधि और आयोजन का स्वरूप इसे अन्य स्थानों से अलग चुनौतीपूर्ण बनाता है।
उन्होंने कहा कि हरिद्वार को प्रत्येक वर्ष करोड़ों कांवड़ यात्रियों और विभिन्न स्नान पर्वों में उमड़ने वाली विशाल भीड़ को सुरक्षित तरीके से उनके गंतव्य तक पहुंचाने का लंबा अनुभव प्राप्त है। यही अनुभव आगामी कुंभ में भीड़ प्रबंधन, श्रद्धालुओं की सुरक्षा और मेला व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
प्रशिक्षण के दौरान पुलिस कार्मिकों को मेला क्षेत्र में संभावित परिस्थितियों के अनुरूप सतर्कता, आपसी समन्वय और त्वरित निर्णय लेने की आवश्यकता पर भी जानकारी दी गई।