गर्भवती युवती को 30 सितंबर को हाईकोर्ट में पेश करने का आदेश, नारी निकेतन में निरुद्ध रखने का आरोप

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए वृंदावन के नारी निकेतन में रह रही युवती को 30 सितंबर 2026 को अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया।

गर्भवती युवती को 30 सितंबर को हाईकोर्ट में पेश करने का आदेश, नारी निकेतन में निरुद्ध रखने का आरोप

प्रयागराज, 28 सितंबर । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने नारी निकेतन, वृंदावन (मथुरा) में रह रही एक युवती को 30 सितंबर 2026 को अदालत के सामने पेश करने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने "किशोर व अन्य की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर यह आदेश दिया है। याचिका युवती के पति किशोर ने दायर की है, जिसका दावा है कि उसने युवती से विवाह किया है। युवती पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज मामले में पीड़िता है।

याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि युवती निरक्षर है और कभी स्कूल नहीं गई, इसलिए उसका कोई स्कूली रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। 27 अप्रैल 2026 को डॉक्टर द्वारा किए गए अस्थि-परीक्षण में उसकी उम्र 17 से 18 वर्ष के बीच आंकी गई है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने प्राथमिकी का हवाला देते हुए कोर्ट को बताया कि उसमें भी युवती के कभी स्कूल न जाने और उम्र करीब 16–17 वर्ष होने का उल्लेख है। यही बात युवती ने बीएनएसएस की धारा 183 के तहत दर्ज अपने बयान में भी दोहराई है।

अधिवक्ता ने दलील दी कि युवती अब 18 वर्ष से अधिक की हो चुकी है, यानी बालिग है। वह वर्तमान में नारी निकेतन, वृंदावन में रह रही है और करीब नौ माह की गर्भवती है। इसी आधार पर उसे अदालत में पेश करने की प्रार्थना की गई, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।