हाईकोर्ट : महिला वकील का पीछा करने के आरोपित वकील की अंतरिम जमानत रद्द

हाईकोर्ट ने बार काउंसिल से आचरण की जांच के दिए निर्देश

हाईकोर्ट : महिला वकील का पीछा करने के आरोपित वकील की अंतरिम जमानत रद्द

प्रयागराज, 21 जुलाई  इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मंगलवार को महिला वकील का कथित रूप से पीछा करने और उत्पीड़न के आरोपित एक वकील की अंतरिम जमानत रद्द करते हुए उसे तत्काल न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। अदालत ने उसके आचरण को अदालत की अवमानना के समान और पूरी तरह गैर-पेशेवर बताते हुए उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को भी उसके आचरण की जांच करने और यह तय करने का निर्देश दिया कि वह वकालत जारी रखने के योग्य है या नहीं। जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने यह आदेश विजय सिंह चौहान की याचिका पर पारित किया।

मामले में हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाली महिला वकील ने एफआईआर दर्ज कराई। उनका आरोप है कि आरोपी वकील करीब 11 महीने से लगातार उनका पीछा कर रहा है और उन्हें परेशान कर रहा है। शिकायत के अनुसार आरोपी बार-बार उनका रास्ता रोकता था, सगाई करने के लिए दबाव बनाता था, लगातार फोन और आपत्तिजनक वॉयस संदेश भेजता था। उस पर महिला वकील की छवि खराब करने, पेशेवर जीवन में हस्तक्षेप करने, अदालत के समक्ष अपनी पहचान को लेकर भ्रामक जानकारी देने तथा मानसिक और पेशेवर उत्पीड़न करने के भी आरोप हैं।

अदालत ने आरोपी को 16 मार्च 2026 को अंतरिम जमानत दी थी। उस समय उसने बिना शर्त माफी मांगते हुए यह लिखित आश्वासन दिया था कि अदालत की अनुमति के बिना हाईकोर्ट परिसर में प्रवेश नहीं करेगा और न ही किसी भी माध्यम से महिला वकील से संपर्क करेगा। हालांकि, मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी ने अपने इस आश्वासन का उल्लंघन किया। पहले उसने जस्टिस के चैंबर में सीधे आवेदन भेजकर हाईकोर्ट परिसर में प्रवेश और वकालत करने की अनुमति मांगी।

इस पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि किसी आदेश में संशोधन कराना हो तो विधि सम्मत तरीका रजिस्ट्री के माध्यम से आवेदन दाखिल करना है, न कि सीधे जज के चैंबर में आवेदन भेजना। अदालत ने कहा, "प्रथम दृष्टया यह कृत्य मुझे प्रभावित करने का प्रयास प्रतीत होता है और यह न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप की श्रेणी में आ सकता है।"

इसके अलावा सुनवाई के दिन आरोपी स्वयं अदालत में उपस्थित मिला, जबकि उसने स्पष्ट आश्वासन दिया था कि वह अदालत नहीं आएगा ताकि पीड़िता किसी प्रकार का भय महसूस न करे।

इस पर अदालत ने कहा, "आज अदालत यह देखकर आश्चर्यचकित है कि आरोपी अपने वकील की मौजूदगी के बावजूद स्वयं अदालत में उपस्थित है। यह उसके दिए गए आश्वासन का सीधा उल्लंघन है।"

इन परिस्थितियों को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने आरोपी की अंतरिम जमानत तत्काल प्रभाव से रद्द की और उसे हिरासत में लेकर संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश कर जेल भेजने का निर्देश दिया। अदालत ने पीड़िता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह भी आदेश दिया कि मुकदमे के निष्पादन तक उन्हें उपलब्ध कराई गई व्यक्तिगत सुरक्षा जारी रखी जाए। साथ ही अदालत ने आदेश की प्रति उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के सचिव को भेजने का निर्देश देते हुए कहा कि आरोपी वकील के आचरण की जांच की जाए और कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाए।