सरकारी धन हड़पने की जांच रिपोर्ट पर प्रमुख सचिव को बुलाने पर जागा विभाग
प्रशासक हटे, एस डी एम को मिला चार्ज
प्रयागराज, 14 अक्टूबर । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने क्षेत्र पंचायत प्रमुख द्वारा सरकारी धन के भारी गबन के मामले में जांच रिपोर्ट पर 14 महीने तक कार्रवाई न करने पर कड़ी नाराजगी जताई है। न्यायालय की सख्ती और प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से तलब करने के बाद ही विभाग हरकत में आया और क्षेत्र पंचायत प्रमुख को प्रशासक पद से हटाया गया।
मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली तथा न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेन्द्र की खंडपीठ ने यह आदेश जितेंद्र सिंह की याचिका पर दिया।
याचिका में मांग की गई थी कि एडीएम (जे) जालौन द्वारा 07.अगस्त .2025 को दी गई विस्तृत जांच रिपोर्ट, जिसमें क्षेत्र पंचायत प्रमुख पर भारी सरकारी धन के गबन का आरोप है, पर अंतिम निर्णय लिया जाए।
कोर्ट ने कहा था कि रिपोर्ट के बावजूद प्रतिवादी कोई कार्रवाई करने को तैयार नहीं हैं और तरह-तरह से मामले को लटकाया जा रहा है। अब फिर से कुछ बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी गई है। इस पर कोर्ट ने प्रमुख सचिव, पंचायती राज विभाग को 12.अक्टूबर 2026 को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का निर्देश दिया। प्रमुख सचिव हाजिर हुए और हलफनामा दाखिल किया। बताया गया कि 09 अक्टूबर 2026 को सरकार ने अंतिम जांच कराने का निर्णय लिया है और जिलाधिकारी, जालौन को जांच अधिकारी नामित किया है और रिपोर्ट आने तक क्षेत्र पंचायत प्रमुख को प्रशासक पद से हटाने का निर्णय लिया गया। जिलाधिकारी ने आदेश जारी किया और 12 अक्टूबर 2026 को उप जिलाधिकारी ने क्षेत्र पंचायत, नंदीगांव, जिला जालौन के प्रशासक का चार्ज ले लिया।
खंडपीठ ने कहा कि यह स्पष्ट है कि 28 सितंबर 2026 को प्रमुख सचिव की व्यक्तिगत उपस्थिति का आदेश होने के बाद ही 3 दिन में सारे आदेश हुए। सरकारी धन के गबन जैसे गंभीर मामले में 07 अगस्त 2025 की रिपोर्ट पर 14 महीने तक कार्रवाई न करना सुस्त रवैया है, जो कानून के खिलाफ है और स्वीकार नहीं किया जा सकता।