एक साथ नहीं लगायी जा सकती आईपीसी की धारा 420 और 406 : हाईकोर्ट
एक साथ नहीं लगायी जा सकती आईपीसी की धारा 420 और 406 : हाईकोर्ट
प्रयागराज, 18 जून। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि भारतीय दण्ड संहिता की धारा 420 और 406 एक साथ नहीं लगायी जा सकती। किसी केस में यह दोनों धाराएं एक साथ लगायी गयी हैं तो वह केस कानून की नजर में टिक नहीं सकता।
यह फैसला न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव ने सुनाया है। मेरठ जिले के सिविल लाइंस थाने में दर्ज (राज्य बनाम अभिषेक गौतम) केस को संज्ञान लिये जाने और उस पर जारी सम्मन को रद्द कर दिया है।
यह केस, धारा 420, 406, 504, 506 आईपीसी, थाना सिविल लाइन्स, जिला मेरठ से जुड़ा है। याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम और अतिप्रिया गौतम एडवोकेट ने पक्ष रखा। तर्क दिया कि प्रथम सूचना रिपोर्ट में जो भी तथ्य दिये गये हैं वह गलत तथ्यों पर आधारित है। केस में दिये गये तथ्य मनमाने और मनगढ़ंत हैं, जिसका वास्तविकता से कोई लेना देना नहीं है।
कोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली रेस क्लब केस में सुनाये गये लैंडमार्क फैसले का जिक्र किया जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आपराधिक विश्वासघात और धोखाधड़ी के बीच फर्क है। धोखाधड़ी के लिए गलत या गुमराह करने वाली बात कहते समय यानी शुरुआत से ही आपराधिक नीयत का होना जरूरी है। आपराधिक विश्वासघात में सिर्फ यह साबित करना काफी है कि कोई चीज भरोसे में सौंपी गई थी।
इस तरह आपराधिक विश्वासघात के मामले में अपराधी को कानूनी तौर पर संपत्ति सौंपी जाती है और वह बेईमानी से उसका गलत इस्तेमाल करता है। जबकि धोखाधड़ी के मामले में अपराधी किसी व्यक्ति को धोखा देकर या बहकाकर कोई संपत्ति देने के लिए उकसाता है। ऐसी स्थिति में दोनों अपराध एक साथ नहीं हो सकते, बेंच ने मेरठ जिले के सिविल लाइंस थाने में दर्ज (राज्य बनाम अभिषेक गौतम) केस को संज्ञान लिये जाने और उस पर जारी सम्मन को रद्द कर दिया है।