महाराणा प्रताप भारतीय स्वाभिमान, स्वातंत्र्य चेतना और राष्ट्रगौरव के अमर प्रतीक:प्रो.बिहारी लाल शर्मा
—संपूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती उत्साह के साथ मनी
वाराणसी,09 मई । उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित संपूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती शनिवार को उल्लासपूर्ण माहौल में राष्ट्रभक्ति के भाव के साथ मनाई गई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने महाराणा प्रताप के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों ने भी महान योद्धा के चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके आदर्शों को स्मरण किया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि महाराणा प्रताप केवल मेवाड़ के महान शासक ही नहीं, बल्कि भारतीय स्वाभिमान, स्वातंत्र्य चेतना और राष्ट्रगौरव के अमर प्रतीक हैं। उनका सम्पूर्ण जीवन मातृभूमि की रक्षा, संस्कृति के संरक्षण तथा आत्मसम्मान की प्रतिष्ठा के लिए समर्पित रहा। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी कभी अपने सिद्धांतों और राष्ट्रधर्म से समझौता नहीं किया। कुलपति ने कहा कि महाराणा प्रताप का संघर्ष केवल राजसत्ता के लिए नहीं था, बल्कि भारतीय संस्कृति, अस्मिता और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए था। जंगलों में रहकर कठिन जीवन व्यतीत करना, घास की रोटियां खाना और अभावों को सहन करना उनकी अद्भुत राष्ट्रनिष्ठा, त्याग और आत्मबल का प्रमाण है। उनका जीवन आज भी हर भारतीय को यह प्रेरणा देता है कि राष्ट्र और स्वाभिमान से बढ़कर कोई मूल्य नहीं हो सकता।
कुलपति प्रो. शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में युवा पीढ़ी को महाराणा प्रताप के जीवन से साहस, आत्मविश्वास, संघर्षशीलता एवं कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा ग्रहण करनी चाहिए। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने महाराणा प्रताप के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने तथा राष्ट्र एवं संस्कृति की रक्षा के लिए सदैव समर्पित रहने का संकल्प लिया।