एक मुचलका व दो प्रतिभूति लेकर सभी 13 केसों में मिली जमानत पर रिहाई का निर्देश
एक मुचलका व दो प्रतिभूति लेकर सभी 13 केसों में मिली जमानत पर रिहाई का निर्देश
प्रयागराज, 24 जून (हि.स.)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 13 आपराधिक मामलों में आरोपी को बड़ी राहत देते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने प्रतिवादी को सभी 13 मामलों में अलग-अलग प्रतिभूतियाँ (Sureties) जमा करने में असमर्थता को देखते हुए, एक ही जमानत मुचलके (Bail Bond) और दो जमानतदारों (Sureties) के साथ रिहा करने का निर्देश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की एकलपीठ ने ललितपुर के एक निवासी, महेश प्रसाद रजक की दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिकाकर्ता महेश प्रसाद रजक ने अपनी अर्जी में बताया था कि उसके खिलाफ ललितपुर के विभिन्न थानों, जिनमें कोतवाली, जखौरा, जालौन, महरौनी, ताल बेहट, नरहट आदि शामिल हैं, में कुल 13 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इन सभी मामलों में उसे अदालत से जमानत मिल चुकी है। हालांकि, हर मामले में दो प्रतिभूतियाँ और एक अलग जमानत मुचलका जमा करने का आदेश दिया गया था।
महेश प्रसाद रजक के लिए हर मामले में अलग-अलग दो प्रतिभूतियाँ खोजना आर्थिक और व्यावहारिक रूप से अत्यंत कठिन साबित हो रहा था। इस समस्या को अदालत के समक्ष रखते हुए, उसने निवेदन किया था कि उसके द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले एक जमानत मुचलके और दो जमानतदारों को ही उसके खिलाफ दर्ज सभी 13 आपराधिक मामलों के लिए स्वीकार कर लिया जाए।
न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता की दयनीय स्थिति और व्यावहारिक कठिनाई को समझते हुए उसकी अर्जी को स्वीकार किया। कोर्ट ने माना कि एक ही तरह की जमानत की शर्तों को सभी मामलों में अलग-अलग दोहराना अनावश्यक है, खासकर जब आरोपी को सभी मामलों में जमानत मिल चुकी हो। इस आधार पर, एकलपीठ ने निर्देश दिया कि महेश प्रसाद रजक को एक जमानत मुचलके और दो जमानतदारों के साथ रिहा किया जाए, और इन जमा की गई प्रतिभूतियों को उसके खिलाफ दर्ज सभी 13 आपराधिक मामलों के लिए पर्याप्त माना जाए। इस फैसले से महेश प्रसाद रजक को बड़ी राहत मिली है और उसे जेल से रिहा होने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।