भारतीयता कोई विचारधारा नहीं, बल्कि जीवन जीने की संपूर्ण पद्धति है: साध्वी दिव्य प्रभानंद

भारतीयता कोई विचारधारा नहीं, बल्कि जीवन जीने की संपूर्ण पद्धति है: साध्वी दिव्य प्रभानंद

भारतीयता कोई विचारधारा नहीं, बल्कि जीवन जीने की संपूर्ण पद्धति है: साध्वी दिव्य प्रभानंद

प्रयागराज, 20 जुलाई । भारतीयता कोई विचारधारा नहीं, बल्कि जीवन जीने की संपूर्ण पद्धति है, जो आत्मा से आत्मा तक संवाद करती है। उक्त बात रविवार को श्रीनिवास रामानुजन पब्लिक स्कूल प्रयागराज में शंख संस्थान द्वारा आयोजित दो दिवसीय भारतीयता विषयक कार्यशाला के समापन सत्र को संबोधित करते हुए पूज्य साध्वी दिव्यप्रभानंद ने कहा।

उन्होंने वैदिक संदेश और प्रेरणास्पद अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीयता कोई विचारधारा नहीं, बल्कि जीवन जीने की संपूर्ण पद्धति है, जो आत्मा से आत्मा तक संवाद करती है।

इससे पूर्व कार्यशाला में युवाओं को भारतीय जीवन दृष्टि, अध्यात्म, विधि और समाज के विविध पहलुओं से परिचित कराने हेतु गहन संवाद हुआ। दिवस की शुरुआत प्रातः ध्यान और साधना से हुई, जिसका संचालन आध्यात्मिक अन्वेषक एवं दृश्य कलाकार धर्मेंद्र कुमार ने किया।

इसके पश्चात पहले सत्र में इस्कॉन प्रयागराज तथा वाराणसी के अध्यक्ष पूज्य आचार्य अच्युत मोहन प्रभु ने युवाओं को भक्ति, अनुशासन और भारतीय सांस्कृतिक चेतना की शक्ति से अवगत कराया।

दूसरे सत्र में उत्तर प्रदेश के अपर महाधिवक्ता अशोक मेहता ने समाज और भारतीयता के अंतःसंबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय दृष्टिकोण से न्याय केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, अपितु धर्म का अनुकरण है। उन्होंने गांधी की की पुस्तक हिंदवी स्वराज पर व्याख्यान दिया और विद्यार्थियों को भारतीयता को जीवन में आत्मसात करने हेतु बात कही।

तीसरे सत्र में वरिष्ठ पत्रकार अखंड प्रताप शाही (लखनऊ) ने आधुनिक भारत की मीडिया और संस्कृति में भारतीयता के स्थान पर विस्तृत चर्चा की।

इसके बाद प्रतिभागियों के लिए पूज्य सर्वदेव के निर्देशन में समूह गतिविधियाँ आयोजित की गईं, जिनमें भारतीय मूल्य, परंपरा और नैतिक संवाद का अभ्यास कराया गया, इस सत्र का संचालन इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सहायक आचार्य डॉ मृत्युंजय राव परमार ने किया।

चौथे सत्र में अधिवक्ता परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सत्यप्रकाश राय ने युवाओं को भारतीय विधिक परंपरा की गहराई से परिचित कराते हुए कहा कि “भारत के न्यायशास्त्र की जड़ें वेद, स्मृति और नीति में हैं, जिन्हें समझना ही भारतीयता की मूल आत्मा को जानना है।”

इस समापन सत्र की विशिष्ट अतिथि इलाहाबाद विश्वविद्यालय की राजनीति विज्ञान विभाग से सेवा निवृत्त प्रो. डॉ. कृष्णा गुप्ता ने भारतीय शिक्षा प्रणाली में संस्कृति और मूल्य आधारित शिक्षा के पुनर्स्थापन पर बल दिया।

विशेष अतिथियों में प्रयागराज एलडीसी पब्लिक स्कूल की निदेशक पूजा गुप्ता,लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार अखंड प्रताप शाही एवं प्रयागराज श्रीनिवास रामानुजन पब्लिक स्कूल के अध्यक्ष अपूर्व उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन शंख संस्थान के संयोजक आलोक कुमार सिंह ने किया एवं समापन पर उन्होंने सभी अतिथियों, वक्ताओं, आयोजकों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। यह कार्यशाला युवाओं में भारतीयता के बीज बोने की एक सफल और दूरदर्शी पहल सिद्ध हुई।