नाबालिग स्टूडेंट को बुर्का पहनाने और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने की आरोपित छात्रा की अग्रिम जमानत मंजूर
नाबालिग स्टूडेंट को बुर्का पहनाने और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने की आरोपित छात्रा की अग्रिम जमानत मंजूर
प्रयागराज, 06 मई । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने स्कूली छात्रा को अग्रिम जमानत दी है, जिस पर आरोप है कि उसने नाबालिग छात्रा का कथित रूप से ब्रेनवॉश कर उसे बुर्का पहनने और इस्लाम धर्म अपनाने के लिए दबाव डाला।
जस्टिस अवनीश सक्सेना की पीठ ने आरोपी छात्रा मालिश्का उर्फ मालिश्का फातमा को राहत देते हुए कहा कि पीड़िता के बयान के अतिरिक्त रिकॉर्ड पर ऐसा कोई अन्य ठोस साक्ष्य नहीं है, जिससे आरोपित की संलिप्तता प्रथम दृष्टया स्थापित हो सके।
आरोपित के खिलाफ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3 और 5(1) के तहत मामला थाना-बिलारी, मुरादाबाद में दर्ज किया गया है। एफआईआर पीड़िता के भाई ने दर्ज कराई। आरोप लगाया गया कि आरोपित ने उसकी नाबालिग बहन का धर्म परिवर्तन कराने के उद्देश्य से उसका ब्रेनवॉश किया। यह भी कहा गया कि 20 दिसम्बर 2025 को उसे जबरन बुर्का दिया गया और लगातार धर्म बदलने का दबाव बनाया गया।
राज्य सरकार की ओर से अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि पीड़िता के बयान से स्पष्ट है कि उस पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डाला जा रहा था। एफआईआर दर्ज करने में देरी के संबंध में यह दलील दी गई कि पीड़िता आरोपित के प्रभाव में थी, इसलिए जानकारी मिलने में समय लगा।
वहीं आरोपित की ओर से कहा गया कि वह पीड़िता से पहले से उसी विद्यालय में पढ़ रही थी और उसके खिलाफ किसी अन्य छात्रा को धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने की कोई शिकायत नहीं है। अदालत को यह भी बताया गया कि मामले के मुख्य आरोपी सह-अभियुक्त अलीना के खिलाफ हैं, जिसे हाईकोर्ट की एक पीठ पहले ही अग्रिम जमानत दे चुकी है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि अग्रिम जमानत पर विचार करते समय आरोपों की गंभीरता, गिरफ्तारी की आशंका, आरोपित का आपराधिक इतिहास, झूठे फंसाए जाने की संभावना, हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता, जांच में सहयोग तथा फरार होने के जोखिम जैसे पहलुओं का मूल्यांकन किया जाता है। पीठ ने पाया कि आरोपित का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और पीड़िता के बयान के अलावा उसके खिलाफ अन्य स्वतंत्र साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। साथ ही अदालत ने माना कि आरोपित के फरार होने की सम्भावना कम है तथा उसने जांच और ट्रायल में सहयोग का आश्वासन दिया है। इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने आरोपी स्टूडेंट को अग्रिम जमानत दे दी है।