अधिशासी अभियंता का रोका वेतन, मंडलायुक्त बोले-बैठक में स्वयं उपस्थित हों

अधिशासी अभियंता का रोका वेतन, मंडलायुक्त बोले-बैठक में स्वयं उपस्थित हों

अधिशासी अभियंता का रोका वेतन, मंडलायुक्त बोले-बैठक में स्वयं उपस्थित हों

मीरजापुर, 10 फरवरी। विन्ध्याचल मण्डल में विकास की रफ्तार और कानून व्यवस्था की नब्ज टटोलने के लिए मण्डलायुक्त राजेश प्रकाश पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आए। आयुक्त कार्यालय सभागार में हुई उच्चस्तरीय बैठक में उन्होंने विकास प्राथमिकता योजनाओं, निर्माणाधीन परियोजनाओं, राजस्व कार्यों और छोटी-सहायक नदियों के पुनरोद्धार की गहन समीक्षा की और साफ शब्दों में कहा कि अब न बहाने चलेंगे, न लापरवाही।

बैठक में मीरजापुर, सोनभद्र और भदोही के जिलाधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों और मुख्य विकास अधिकारियों के साथ मण्डलीय अधिकारियों की मौजूदगी में योजनाओं की एक-एक परत खोली गई। समीक्षा में सामने आया कि राजस्व से जुड़ी 32 योजनाओं और विकास की 62 योजनाओं में तीनों जनपदों ने ‘ए’ श्रेणी हासिल कर बेहतर प्रदर्शन किया है। जिसे मण्डलायुक्त ने सराहा। बैठक में अपर जिलाधिकारी, भू-राजस्व अधिकारी और नमामि गंगे से जुड़े अधिकारी भी मौजूद रहे।

--बी व सी श्रेणी वालों को अल्टीमेटम

मण्डलायुक्त ने बी और सी श्रेणी में रहने वाले अधिकारियों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि अगले माह हर हाल में सुधार दिखना चाहिए, वरना कठोरतम कार्रवाई तय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी योजनाएं कागजों में नहीं, जमीन पर दिखनी चाहिए।



निर्माणाधीन परियोजनाओं में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर समझौता न करने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि जहां धनाभाव है, वहां तत्काल पत्राचार कर धनराशि अवमुक्त कराई जाए। पूर्ण हो चुकी परियोजनाओं का तकनीकी परीक्षण कर हैंडओवर की प्रक्रिया तेज करने को भी कहा गया। दिसम्बर 2026 तक पूरी होने वाली परियोजनाओं की स्थलीय निरीक्षण आख्या अनिवार्य करने के निर्देश दिए गए।



बैठक में अनुपस्थित रहने पर लोक निर्माण विभाग (पीएमजीएसवाई) सोनभद्र के अधिशासी अभियंता पर कड़ा रुख अपनाते हुए अग्रिम आदेश तक वेतन अदेय करने का निर्देश दिया गया। साथ ही सभी अधिकारियों को हिदायत दी गई कि बैठक में स्वयं उपस्थित हों, सहायक भेजने की परम्परा बंद करें।



कानून व्यवस्था की समीक्षा में मण्डलायुक्त ने गुण्डा एक्ट, गैंगस्टर एक्ट जैसे मामलों में सख्त कार्रवाई और अपराधियों को अधिकतम सजा दिलाने के निर्देश दिए। उनका स्पष्ट संदेश था कि अपराध पर कोई नरमी नहीं होगी।