हज यात्रियों से अवैध वसूली का आरोप लगा, बिफरे अनीस मंसूरी
हज यात्रियों से अवैध वसूली का आरोप लगा, बिफरे अनीस मंसूरी
लखनऊ, 29 अप्रैल। हज जैसे मुकद्दस फर्ज़ की अदायगी के लिए जा रहे गरीब मुसलमानों पर 'डिफरेंशियल एयरफेयर' के नाम पर 10 हजार रुपये का अतिरिक्त बोझ डालने के फैसले का पसमांदा मुस्लिम समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री अनीस मंसूरी ने हज कमेटी पर गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने सरकार के इस कदम को "मजबूर हाजियों का खुला दोहन" और "जज़्बातों की डकैती" करार देते हुए सरकार और हज कमेटी को आड़े हाथों लिया है।
मंसूरी ने बुधवार को पत्रकावार्ता में कहा कि, 22 अप्रैल को जब उत्तर प्रदेश राज्य हज कमेटी के चेयरमैन दानिश आजाद अंसारी और अन्य सदस्यों ने आज़मीन-ए-हज को झंडी दिखाकर रवाना किया था, तभी हम समझ गए थे कि इस पवित्र सफर में कोई बहुत बड़ी बाधा आने वाली है। हमारी वह शंका आज बिल्कुल सच साबित हुई। सरकार ने रवानगी के आखिरी चरण में हर हज यात्री पर 10 हजार रुपये का आर्थिक 'कर्ज़' ठोक दिया है।"
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश से हज पर जाने वाले अधिकांश आज़मीन पसमांदा तबके से आते हैं, जो सालों तक अपनी पाई-पाई जोड़कर इस पाक सफर की रकम जुटाते हैं। मंसूरी ने तीखे लहजे में सवाल उठाया "जब हज का बजट महीनों पहले तय हो चुका था, तो रवानगी के समय यह अवैध वसूली किस आधार पर की जा रही है? क्या यह मान लिया गया है कि हाजी मजबूर हैं और उनसे कुछ भी वसूला जा सकता है? अभी तो हज मुकम्मल भी नहीं हुआ, सफर का पहला चरण शुरू हुआ है और सरकार ने हर हाजी को अपना कर्जदार बना दिया।
अनीस मंसूरी ने उत्तर प्रदेश राज्य हज कमेटी के अध्यक्ष दानिश आजाद अंसारी और उनकी पूरी टीम की खामोशी पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने मांग की कि दानिश आजाद अंसारी दलगत राजनीति और अपनी कुर्सी के मोह से ऊपर उठें। हज कमेटी ऑफ इंडिया के इस 'कुत्सित कृत्य' की कड़े शब्दों में निंदा करें। हाजियों के हक के लिए आवाज उठाते हुए इस 10,000 रुपये की बढ़ोतरी को वापस लेने की तत्काल मांग करें।