वाराणसी में अनोखा उत्सव: CM योगी के 54वें जन्मदिन पर समर्थकों ने चढ़ाया 54 किलो का लड्डू केक, लगाए हनुमान जी के प्रिय पौधे
देशी घी के महाप्रसाद और पर्यावरण संकल्प का अनूठा संगम; सीएम योगी के निर्भीक नेतृत्व और दीर्घायु के लिए वाराणसी में विशेष अनुष्ठान
वाराणसी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज (5 जून) अपना 54वां जन्मदिन मना रहे हैं।

वाराणसी के प्रसिद्ध श्री वरद आंजनेय मंदिर में सीएम योगी के प्रशंसकों ने उनके जीवन के 54 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में हर तरफ '54' के आंकड़े का एक अद्भुत संयोग तैयार किया।
54 किलो का 'लड्डू केक' और विशेष अनुष्ठान
उत्सव की शुरुआत मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-अर्चना और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुई। सीएम योगी के निर्भीक नेतृत्व और उत्तम स्वास्थ्य की कामना के साथ भगवान हनुमान को शुद्ध देसी घी से बना 54 किलोग्राम का विशाल लड्डू केक अर्पित किया गया। पूजा के बाद इस महाप्रसाद को उपस्थित श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में वितरित किया गया।

54 विकास परियोजनाओं के नाम 54 पौधे
इस आयोजन की सबसे खास बात इसकी पर्यावरण-हितैषी (Eco-friendly) सोच रही। मंदिर परिसर और आस-पास के क्षेत्रों में ठीक 54 पौधे रोपे गए। आयोजकों के मुताबिक, ये 54 पौधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा राज्य में शुरू की गई 54 बड़ी विकास और जन-कल्याणकारी परियोजनाओं के प्रतीक हैं।
इस पौधारोपण में विशेष रूप से उन वृक्षों को चुना गया जो संकटमोचन भगवान हनुमान को अत्यंत प्रिय हैं:
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नीम (औषधीय गुणों से भरपूर)
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बरगद (दीर्घायु और स्थिरता का प्रतीक)
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सिंदूर के पौधे (धार्मिक महत्व)
31 जुलाई तक 5,400 पौधे लगाने का संकल्प

आयोजन में शामिल प्रशंसकों और स्थानीय नेताओं ने केवल 54 पौधों पर ही विराम नहीं लगाया। मुख्यमंत्री के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त करते हुए सभी ने सामूहिक रूप से एक बड़ा संकल्प लिया। इसके तहत आगामी 31 जुलाई तक पूरे क्षेत्र में 5,400 पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। समर्थकों का कहना है कि यह "ग्रीन ट्रिब्यूट" (हरित श्रद्धांजलि) मुख्यमंत्री के उस विजन को समर्पित है, जिसमें वे उत्तर प्रदेश को स्वच्छ और हरा-भरा बनाने पर जोर देते हैं।
निडर शासन के लिए मांगी दुआएं

वाराणसी में हुए इस भव्य आयोजन में शामिल लोगों ने कहा कि वे भगवान से प्रार्थना करते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसी तरह पूरी निडरता और ईमानदारी के साथ उत्तर प्रदेश और राष्ट्र की सेवा करते रहें। सन्यासी परंपरा के कारण लखनऊ में भले ही कोई औपचारिक जश्न न हो, लेकिन काशी की जनता ने अध्यात्म और पर्यावरण को जोड़कर सीएम योगी को एक नायाब तोहफा दिया है।
