गीता का ज्ञान ही सत्य, धर्म और शांति का मार्ग : स्वामी अड़गड़ानंद महाराज
गीता का ज्ञान ही सत्य, धर्म और शांति का मार्ग : स्वामी अड़गड़ानंद महाराज
मीरजापुर, 18 जुलाई । उत्तर प्रदेश के जनपद मीरजापुर में चुनार क्षेत्र स्थित परमहंस आश्रम, सक्तेशगढ़ में शनिवार दोपहर आयोजित सत्संग में हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए आश्रम के स्वामी अड़गड़ानंद महाराज ने कहा कि मानव जीवन में सत्य, धर्म और शांति की प्राप्ति का एकमात्र साधन श्रीमद्भगवद्गीता का ज्ञान है। उन्होंने कहा कि गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की संपूर्ण कला और विज्ञान है।
सत्संग हाल में अपने आशीर्वचन के दौरान स्वामी जी ने कहा, "सत्य के मार्ग पर चलने के लिए गीता का ज्ञान आवश्यक है। जिसके पास गीता का ज्ञान नहीं है, वह जीवन में भटकता रहता है।" उन्होंने कहा कि आज का मनुष्य सुख और शांति की तलाश धन, पद और भौतिक संसाधनों में कर रहा है, जबकि वास्तविक आनंद और मानसिक संतुलन केवल गीता के सिद्धांतों को अपनाने से प्राप्त हो सकता है।
स्वामी अड़गड़ानंद महाराज ने कहा कि जिस प्रकार प्रत्येक घर में अन्न, जल और वस्त्र की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार हर परिवार में श्रीमद्भगवद्गीता का होना भी अनिवार्य है। गीता मनुष्य को कर्तव्य पालन, निष्काम कर्म, भक्ति और ज्ञान का संदेश देती है तथा मोह-माया से ऊपर उठकर जीवन को सार्थक बनाने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को माध्यम बनाकर संपूर्ण मानव समाज को जीवन का अमूल्य संदेश दिया। यदि व्यक्ति गीता के उपदेशों को अपने व्यवहार में उतार ले तो पारिवारिक कलह, सामाजिक तनाव और मानसिक अशांति स्वतः समाप्त हो सकती है।
श्रद्धालुओं ने लिया गीता के मार्ग पर चलने का संकल्प
सत्संग के समापन पर श्रद्धालुओं ने स्वामी अड़गड़ानंद महाराज के चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। इस अवसर पर आश्रम के संत नारद महाराज, आशीष महाराज, मनीष बाबा, सोहन बाबा, बबलू बाबा सहित विभिन्न जनपदों से आए हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।