मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बाल चिकित्सा एवं स्नातकोत्तर शैक्षणिक संस्थान, नोएडा की 13वीं शासी निकाय की बैठक सम्पन्न

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बाल चिकित्सा एवं स्नातकोत्तर शैक्षणिक संस्थान, नोएडा की 13वीं शासी निकाय की बैठक सम्पन्न

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बाल चिकित्सा एवं स्नातकोत्तर शैक्षणिक संस्थान, नोएडा की 13वीं शासी निकाय की बैठक सम्पन्न

लखनऊ, 03 जुलाई। मुख्य सचिव एस.पी.गोयल की अध्यक्षता में बाल चिकित्सा एवं स्नातकोत्तर शैक्षणिक संस्थान, नोएडा की 13वीं शासी निकाय (गवर्निंग बॉडी) की बैठक आयोजित की गई। बैठक में संस्थान की ओर से कुल 20 महत्वपूर्ण एजेंडों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। संस्थान के चिकित्सा, शिक्षण एवं शोध कार्यों को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

शासी निकाय ने संस्थान में आपातकालीन विभाग, पीडियाट्रिक पल्मोनोलॉजी विभाग तथा पीडियाट्रिक क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग प्रारम्भ किए जाने को स्वीकृति प्रदान की। इन विभागों के प्रभावी संचालन के लिए आवश्यक विशेषज्ञ चिकित्सकों के पदों के साथ-साथ जूनियर रेजीडेंट एवं सीनियर रेजीडेंट के पदों को भी मंजूरी दी गई।

बैठक में संस्थान में पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों के संचालन के लिए आवश्यक चिकित्सकीय पदों के सृजन को भी स्वीकृति प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त, पीडियाट्रिक एनेस्थीसिया विभाग में पीडियाट्रिक रीजनल एनेस्थीसिया फेलोशिप कार्यक्रम प्रारम्भ किए जाने की अनुमति दी गई, जिससे सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण को नई दिशा मिलेगी तथा विशेषज्ञ मानव संसाधन तैयार करने में सहायता प्राप्त होगी।

शासी निकाय द्वारा लिए गए इन निर्णयों से संस्थान की स्वास्थ्य सेवाओं का व्यापक विस्तार होगा। विशेष रूप से गंभीर एवं आपातकालीन परिस्थितियों में उपचार के लिए आने वाले बच्चों को अत्याधुनिक, गुणवत्तापूर्ण एवं विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं एक ही परिसर में उपलब्ध कराई जा सकेंगी। साथ ही, संस्थान में चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान (रिसर्च) तथा शैक्षणिक गतिविधियों को भी नई गति एवं मजबूती मिलेगी।

बैठक के दौरान संस्थान के भविष्य के विस्तार की आवश्यकता पर भी विस्तार से विचार किया गया। इस संबंध में शासी निकाय ने नोएडा प्राधिकरण को निर्देशित किया कि संस्थान के निकट उपलब्ध उपयुक्त भूमि का चिन्हांकन कर उसका प्रस्ताव शीघ्र शासन को प्रेषित किया जाए, ताकि भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप संस्थान का योजनाबद्ध एवं समग्र विस्तार सुनिश्चित किया जा सके।