वाराणसी सनबीम स्कूल को हाईकाेर्ट से बड़ी राहत
वाराणसी सनबीम स्कूल को हाईकाेर्ट से बड़ी राहत
उच्च न्यायालय ने स्कूल संचालन में हस्तक्षेप पर लगाई रोकप्रयागराज, 03 जुलाई (हि.स.)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वाराणसी के सनबीम स्कूल से जुड़ी याचिकाओं पर राजस्व अधिकारियों के सभी विवादित आदेशों को रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया।
सनबीम स्कूल वाराणसी के लहरतारा गांव में स्थित भूखंड संख्या 145, 146 और 148 पर संचालित है। स्वर्गीय धीरजी देवी को 1988 में अपर आयुक्त (प्रशासन), वाराणसी मंडल के फैसले से इस भूमि का पूर्ण स्वामी घोषित किया गया था, जिसके बाद उन्होंने यह भूमि पट्टे पर स्कूल को दे दी थी। स्कूल ने वाराणसी विकास प्राधिकरण से अनुमति लेकर वैध निर्माण किया था।
याचिकाकर्ता के अनुसार, 2012 में एक जनहित याचिका में मंडलायुक्त की भूमिका उजागर होने के बाद, प्रशासन ने बदले की भावना से कार्रवाई करते हुए एक तीसरे पक्ष (प्रतिवादी संख्या 4) के जरिए आवेदन दिलवाया। इसी आधार पर तृतीय अपर नगर मजिस्ट्रेट ने मात्र पांच दिनों के भीतर, बिना किसी नोटिस या सुनवाई के, 24 साल पुराने परवाना अमलदरामद को रद्द करने का आदेश पारित कर दिया। इसी तरह उप जिलाधिकारी (सदर) ने भी बिना सुनवाई के भूमि को 'आबादी' से हटाकर 'तालाब' घोषित करने के आदेश 21.11.2012 और 20.12.2012 पारित किए।
न्यायालय ने पाया कि न्यायिक/अर्ध-न्यायिक आदेशों को प्रशासनिक तरीके से पलटा गया, जो उनके अधिकार-क्षेत्र से बाहर है।प्रभावित पक्षों को कोई नोटिस या सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया, जो नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।विपक्षी के हलफनामे से यह स्पष्ट हुआ कि उसे जिला प्रशासन ने ही आगे किया था।नगर निगम वाराणसी ने 2002 में ही इस भूमि को अपनी संपत्ति न होने का 'अनापत्ति दिया था, जिसे अब चुनौती नहीं दी जा सकती।खतौनी और खसरा अभिलेखों में भूमि हमेशा मालिकाना' के रूप में दर्ज रही, न कि तालाब के रूप में।
न्यायालय ने दोनों याचिकाएं स्वीकार करते हुए सभी विवादित आदेश रद्द कर दिए और प्रशासन को स्कूल के संचालन में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने से रोक दिया।