यूपी सरकार की एडवोकेट कल्याण योजना के तहत मुआवजा मिलने में देरी पर हाईकोर्ट खफा
यूपी सरकार की एडवोकेट कल्याण योजना के तहत मुआवजा मिलने में देरी पर हाईकोर्ट खफा
प्रयागराज, 09 जुलाई । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार की एडवोकेट वेलफेयर स्कीम के तहत मुआवजा मिलने में हो रही देरी पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने एक दिवंगत अधिवक्ता की विधवा को मुआवजे के लिए बार-बार अदालत के चक्कर लगवाने को जबरन थोपा गया मुकदमा करार देते हुए उत्तर प्रदेश अधिवक्ता कल्याण कोष ट्रस्टी सोसाइटी के सदस्य सचिव से जवाब मांगा है।
यह आदेश न्यायमूर्ति अजीत कुमार एवं न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ल की खंडपीठ ने ज्योतिमा की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। ज्योतिमा ने अपने दिवंगत पति के मुआवजे के लिए वर्ष 2020 में ही आवेदन कर दिया था लेकिन उत्तर प्रदेश अधिवक्ता कल्याण कोष ट्रस्टी सोसाइटी द्वारा उन्हें यह भुगतान नहीं किया गया। उसे हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी, जिसके बाद न्यायालय के हस्तक्षेप पर अक्टूबर 2025 में जाकर उन्हें मूल भुगतान मिला। अब याची ने इस देरी के लिए ब्याज की मांग करते हुए दोबारा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट को पता चला कि वकीलों के कल्याण के लिए बनाई गई इस योजना की देखरेख के लिए महाधिवक्ता की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति बनी है तो कोर्ट ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यह जानकर बेहद खेद हो रहा है कि अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए शुरू की गई योजना को ठीक से लागू नहीं किया जा रहा है। एक दिवंगत वकील की विधवा को मुआवजा पाने के लिए हाईकोर्ट की दौड़ लगानी पड़ रही है। यह पूरी तरह से एक जबरन थोपा गया मुकदमा है।
कहा हलफनामा दाखिल नहीं किया तो व्यक्तिगत हाजिर होना होगा
न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश अधिवक्ता कल्याण कोष ट्रस्टी सोसाइटी लखनऊ के सदस्य सचिव को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने उनसे दो बिंदुओं पर जवाब मांगा है, पहला यह कि ट्रस्ट के पास वर्तमान में अधिवक्ताओं की विधवाओं के ऐसे कितने मुआवजे के आवेदन लंबित हैं? दूसरा, जरूरतमंद और पात्र व्यक्तियों को इस फंड के वितरण में इतनी देरी क्यों की जा रही है? कोर्ट ने यह भी पूछा है कि क्यों न ट्रस्ट की लापरवाही के कारण याची को ब्याज और भारी हर्जाना देने का आदेश किया जाए। न्यायालय ने कहा कि अगली सुनवाई तक सही हलफनामा दाखिल नहीं किया गया, तो सदस्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होना होगा। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 27 जुलाई की तारीख तय की है।