प्रयागराज: ज्येष्ठ अधिक मास पूर्णिमा पर संगम में उमड़ा आस्था का सैलाब, श्रद्धालुओं ने लगाई पवित्र डुबकी
भोर से ही गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पवित्र संगम में स्नान जारी
प्रयागराज : तीर्थराज प्रयाग में ज्येष्ठ अधिक मास की पूर्णिमा तिथि पर आस्था का एक अद्भुत और विहंगम दृश्य देखने को मिल रहा है। मोक्ष की कामना और पुण्य प्राप्ति के लिए त्रिवेणी संगम (गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती) के तट पर भोर से ही श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ पड़ा है। 'हर-हर गंगे' के जयकारों से पूरा संगम क्षेत्र गुंजायमान है।
भोर से ही जारी है स्नान और ध्यान का सिलसिला
ज्येष्ठ अधिक मास की पूर्णिमा का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इसी वजह से प्रयागराज और आस-पास के जिलों के साथ-साथ दूर-दराज से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहाँ पहुँच रहे हैं। भोर की पहली किरण के साथ ही संगम में आस्था की डुबकी लगाने का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह लगातार जारी है। पवित्र स्नान के बाद श्रद्धालु संगम तट पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर रहे हैं और सूर्य देव को अर्घ्य देकर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना कर रहे हैं। घाटों पर दान-पुण्य करने वालों की भी भारी भीड़ देखी जा रही है।
प्रशासन के कड़े सुरक्षा इंतजाम
संगम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के मद्देनजर जिला प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा और सुविधाओं के व्यापक इंतजाम किए हैं।
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जल पुलिस और गोताखोर: घाटों पर गहरे पानी में जाने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की गई है। जल पुलिस और पीएसी (PAC) के गोताखोर लगातार मोटर बोट से संगम क्षेत्र में गश्त कर रहे हैं।
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ट्रैफिक व्यवस्था: श्रद्धालुओं को संगम तक पहुँचने में किसी तरह की असुविधा न हो, इसके लिए ट्रैफिक रूट में भी बदलाव किए गए हैं और पार्किंग की उचित व्यवस्था की गई है।
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मूलभूत सुविधाएं: घाटों पर चेंजिंग रूम, साफ-सफाई और पेयजल की भी पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, ताकि श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो।
धार्मिक मान्यता और महत्व
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, अधिक मास (मलमास) में पूर्णिमा के दिन किया गया स्नान और दान कई गुना अधिक फलदायी होता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से भगवान विष्णु और माँ गंगा की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं। यही कारण है कि आज त्रिवेणी के पावन जल में डुबकी लगाने के लिए भक्तों का तांता लगा हुआ है।
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