जैविक उर्वरकों के प्रयोग से बढ़ेगी मिट्टी की उर्वरता और फसल उत्पादन : डॉ. निमिषा नटराजन

जैविक उर्वरकों के प्रयोग से बढ़ेगी मिट्टी की उर्वरता और फसल उत्पादन : डॉ. निमिषा नटराजन

जैविक उर्वरकों के प्रयोग से बढ़ेगी मिट्टी की उर्वरता और फसल उत्पादन : डॉ. निमिषा नटराजन

प्रयागराज, 11 जून । रसायनिक उर्वरक के उपयोग से मिट्टी को मजबूत करने वाले कृषक मित्र जीव नष्ट हो जाते हैं। वहीं दूसरी तरफ जैविक उर्वरक के प्रयोग से सूक्ष्म जीवीं की संख्या में वृद्धि होने के साथ मिट्टी को उर्वरक क्षमता को मजबूत बनाते हैं।

गुरुवार को कृषि विज्ञान केंद्र, प्रयागराज की वैज्ञानिक डॉ. निमिषा नटराजन एवं डॉ. सुबोध यादव ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जैव उर्वरकों के अधिकाधिक प्रयोग करने से यह न केवल मिट्टी की उर्वरता और संरचना में सुधार करते हैं, बल्कि फसल उत्पादन एवं गुणवत्ता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि जैव उर्वरक पर्यावरण के अनुकूल, सुरक्षित और कम लागत वाले विकल्प हैं, जो टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र, प्रयागराज द्वारा किसानों को जागरूक करते हुए वैज्ञानिकों ने बताया कि जैव उर्वरक ऐसे सूक्ष्मजीव होते हैं जो पौधों की वृद्धि को बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की उत्पादकता में सुधार करते हैं।

दलहनी में राइजोबियम का प्रयोग लाभदायक

कृषि वैज्ञानिक डॉ. निमिषा नटराजन ने कहा कि दलहनी फसलों में राइजोबियम, धान एवं अन्य अनाज फसलों में एजोस्पिरिलम तथा विभिन्न फसलों में एजोटोबैक्टर का प्रयोग करने से पौधों को आवश्यक नाइट्रोजन उपलब्ध होती है और रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम हो जाती है। उन्होंने बताया कि पीएसबी (फॉस्फेट घुलनशील जीवाणु) मिट्टी में उपलब्ध फॉस्फोरस को पौधों के लिए उपयोगी बनाते हैं, जिससे जड़ों का विकास बेहतर होता है और फसल की गुणवत्ता में सुधार आता है। वहीं माइकोराइजा पौधों की जड़ों के साथ सहजीवी संबंध बनाकर पोषक तत्वों और जल के अवशोषण को बढ़ाता है।

अनुशंसित मात्रा में जैव उर्वरक का प्रयोग लाभदायक

कृषि विज्ञान केन्द्र प्रयागराज के वैज्ञानिक डॉ सुबोध यादव ने किसानों को बीज उपचार के माध्यम से जैव उर्वरकों के उपयोग की विधि समझाते हुए कहा कि अनुशंसित मात्रा में जैव उर्वरकों का प्रयोग करने से अंकुरण बेहतर होता है, पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है तथा उत्पादन लागत में कमी आती है। उन्होंने कहा कि जैव उर्वरकों के नियमित उपयोग से मिट्टी की सेहत सुधरती है और कृषि पर्यावरण के अनुकूल बनती है। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग के साथ जैव उर्वरकों को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि इससे खेती अधिक लाभकारी, टिकाऊ और सुरक्षित बन सकेगी। कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किसानों को वैज्ञानिक खेती और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति लगातार जागरूक किया जा रहा है।