सम्राट अशोक के शिलालेखों की प्रतिकृतियों का लोकार्पण 14 को
सम्राट अशोक के शिलालेखों की प्रतिकृतियों का लोकार्पण 14 को
प्रयागराज, 12 मार्च । सम्राट अशोक ने अपने शासनकाल में कुशल नीतियों के माध्यम से देश की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था को उच्च स्तर तक पहुंचाया था। वैश्विक और ऐतिहासिक परिदृश्य में उन्हें एक महान और दूरदर्शी शासक के रूप में देखा जाता है। उन्होंने गौतम बुद्ध के धम्म का प्रचार-प्रसार करते हुए चार सिंहों की लाट स्थापित करवाई, जो आज भारत का राजकीय प्रतीक भी है।
बौद्ध परंपरा के अनुसार भगवान बुद्ध ने “बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय” का संदेश देते हुए सभी प्राणियों के कल्याण की भावना को सर्वोपरि बताया। इसी धम्म के सिद्धांतों का पालन करते हुए सम्राट अशोक ने मनुष्यों के साथ-साथ पशुओं के लिए भी चिकित्सालय बनवाए और अपने संदेशों को शिलालेखों तथा गुहा लेखों पर अंकित कराया, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनसे प्रेरणा ले सकें।
समय के साथ अनेक शिलालेख संरक्षण के अभाव और आक्रमणों के कारण नष्ट हो गए, जो शिलालेख उपलब्ध हैं, उनकी प्रतिकृतियां तैयार कर समाज के सामने प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है। इसी क्रम में बौद्ध कम्यून इंटरनेशनल द्वारा प्रयागराज के नैनी स्थित अरैल में स्थापित एवं संचालित सम्राट हर्षवर्धन बुद्ध विहार में 14 प्रमुख शिलालेखों सहित कुल 19 शिलाओं की प्रतिकृतियां काले ग्रेनाइट पत्थर पर अंकित कर स्थापित की गई हैं।
इन शिलालेखों के माध्यम से भगवान बुद्ध के धम्म संदेशों को पुनः जन-जन तक पहुंचाने और समाज को उनसे परिचित कराने का उद्देश्य है, ताकि राष्ट्र फिर से सुखी, समृद्ध और सुदृढ़ बन सके। इन शिलालेखों की प्रतिकृतियों का लोकार्पण 14 मार्च को सुबह 11 बजे केशव प्रसाद मौर्य करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता बृजेश कुमार मौर्य करेंगे। आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम में लगभग पांच हजार धम्म बंधुओं की उपस्थिति रहने की संभावना है। इसकी जानकारी बौद्ध कम्यून के संरक्षक रणजीत सिंह, संयुक्त निदेशक संस्थान लक्ष्मण प्रसाद कुशवाहा, संस्थान के अध्यक्ष विनोद विक्रम तथा मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. जी.एस. शाक्य ने दी।