सांसदों-विधायकों की केस मानिटरिंग का पारदर्शी तंत्र सहित पोर्टल तैयार करने का निर्देश

--सरकार ने कहा, अब किसी सांसद-विधायक के खिलाफ केस वापसी का मामला मेच्योर नहीं

प्रयागराज, 17 मार्च । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्रदेश में सांसदों विधायकों के खिलाफ विशेष अदालतों में चल रहे आपराधिक केसों के ट्रायल की प्रभावी मानिटरिंग के लिए पारदर्शी तंत्र का उचित पोर्टल तैयार करने के हर कदम उठाने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने कहा है कि काफी समय बीत चुका है अब आगे और देरी न की जाय। हाईकोर्ट के अधिवक्ता सुधीर मेहरोत्रा ने इसके लिए समय मांगा, जिस पर कोर्ट ने अगली सुनवाई की तिथि 03 अप्रैल नियत की है। यह आदेश न्यायमूर्ति एस डी सिंह तथा न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने एमपी एमएलए विशेष अदालतों को लेकर स्वयं कायम जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है।

अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल व कार्यकारी शासकीय अधिवक्ता पतंजलि मिश्र ने बताया कि अब किसी का केस वापस लेने का मामला नहीं है।

अपर महाधिवक्ता राहुल अग्रवाल ने पुराने लम्बित आपराधिक केस ट्रायल की रिपोर्ट पेश की। बताया कि रूप चौधरी केस की मूल पत्रावली पुनरीक्षण याचिका में पारित आदेश के तहत तलब कर ली गई है। तीन साल बीत चुके हैं, सुनवाई रूकी है।

बृजेश सिंह केस में हाईकोर्ट से स्थगनादेश है। याचिका लम्बित है। कपिल मुनि करवरिया केस में 31 दिसम्बर 2002 से स्थगनादेश है। कोर्ट ने कहा प्रशासनिक स्तर पर हाईकोर्ट ने कहा है कि फोटो कापी रखकर केस की मूल पत्रावली ट्रायल कोर्ट को वापस कर दी जाय। कोर्ट ने हाईकोर्ट के अधिवक्ता से इन केसों के लिस्टिंग की जानकारी उपलब्ध कराने को भी कहा है।