गंगा में इफ्तार पार्टी के मामले में छह और आराेपिताें की जमानत मंजूर

गंगा में इफ्तार पार्टी के मामले में छह और आराेपिताें की जमानत मंजूर

प्रयागराज, 18 मई । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वाराणसी में पवित्र गंगा नदी में इफ्तार पार्टी आयोजित करने, मांसाहारी भोजन खाने और हड्डियां व खाने का कचरा नदी में फेंकने के छह अन्य आरोपितों दानिश सैफी, नूर इस्लाम, आमिर कैफ़ी, महफूज आलम, मोहम्मद अहमद एवं मोहम्मद अव्वल की जमानत मंजूर कर ली।

यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ल ने इसी अपराध में आठ आरोपितों की जमानत होने पर उन्हीं शर्तों के साथ दिया है। इससे पहले गत 15 मई को कुछ आरोपितों को जमानत देते हुए कोर्ट ने कहा था कि आरोपियों ने अपने प्रार्थना पत्र में उनके द्वारा किए गए कृत्यों के लिए माफी मांगी है। याचियों ने कहा था कि वे और उनके परिवार सामाजिक स्तर पर जो लगे आरोपों के लिए सभी से ईमानदारी से खेद व्यक्त करते हैं और पीड़ा महसूस करते हैं।

कोर्ट ने कहा कि आरोपितों के हलफनामे के पैरा 14 में किए गए कथन दर्शाते हैं कि वे अपने कृत्यों के लिए खेद व्यक्त कर रहे हैं और उनके परिवारों को भी समाज को हुई पीड़ा पर खेद है। कोर्ट यह भी समझती है कि आपराधिक मामले में अभियोजन का सामना करते समय, जेल में बंद व्यक्ति की ओर से हलफनामा देने वाले व्यक्ति द्वारा अपराध की स्पष्ट स्वीकृति नहीं की जा सकती और जमानत देते समय अपराध की स्वीकृति आवश्यक नहीं है।

आरोपितों को जमानत देते हुए कोर्ट ने कहा था कि अपर महाधिवक्ता की यह आशंका कि इफ्तार पार्टी का आयोजन, वीडियो का अपलोड होना और धार्मिक विद्वेष पैदा करने के लिए उसका इस्तेमाल एक बड़ी साजिश का हिस्सा है, कोर्ट की राय में जांच बाधित नहीं होगी और आरोपितों को जेल में आगे हिरासत में रखे बिना भी उक्त जांच जारी रह सकती है। गत 17 मार्च से जेल में बंद आरोपितों ने खेद व्यक्त किया है और भविष्य में ऐसा कोई कृत्य न करने का वचन भी दिया है।

कोर्ट ने कहा कि मामले के तथ्यों व परिस्थितियों, आरोपियों की आपराधिक पृष्ठभूमि न होने, पहले से भुगती गई हिरासत की अवधि और उनके द्वारा मांगी गई माफी को ध्यान में रखते हुए प्रथमदृष्टया जमानत का मामला बनता है।

मामले के तथ्यों के अनुसार वाराणसी के कोतवाली थाने में 16 मार्च को भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष रजत जायसवाल ने इस घटना को लेकर एफआईआर दर्ज कराई थी। 15 मार्च को गंगा में नाव पर रोजा इफ्तार करने वाले लोगों पर स्थानीय भाजपा युवा मोर्चा कार्यकर्ता रजत जायसवाल ने मांस खाने और नीचे नदी में कचरा फेंकने का आरोप लगाया था। उनके अनुसार आरोपितों के कृत्य से समुदाय विशेष की भावनाएं आहत हुईं। इसके बाद आरोपियों गिरफ्तार कर लिया गया और पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की पूजा स्थल को अपवित्र करने, धार्मिक भावनाएं आहत करने व बाद में वसूली से सम्बंधित कई धाराएं लगाईं।