कला सृजनात्मक क्षमता को निखारने का प्रभावी माध्यम : डॉ. मिठाई लाल
कला सृजनात्मक क्षमता को निखारने का प्रभावी माध्यम : डॉ. मिठाई लाल
कानपुर, 18 जून । कला केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास और सृजनात्मक क्षमता को निखारने का सशक्त साधन है। बच्चों और युवाओं को कला से जोड़ने वाली गतिविधियां उनकी कल्पनाशीलता, आत्मविश्वास और रचनात्मक सोच को विकसित करती हैं। व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागी नई कलात्मक तकनीकों को सीखते हैं और अपनी प्रतिभा को बेहतर ढंग से अभिव्यक्त कर पाते हैं। यह बातें इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स के निदेशक डॉ. मिठाई लाल ने कहीं।
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स द्वारा आयोजित ग्रीष्मकालीन कला कार्यशाला के अंतर्गत प्रतिभागियों को क्ले मॉडलिंग (मृत्तिका शिल्प) एवं पॉट मेकिंग (मिट्टी के पात्र निर्माण) का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। कार्यशाला में बच्चों एवं युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए मिट्टी से विभिन्न कलात्मक आकृतियों और उपयोगी पात्रों का निर्माण करना सीखा।
कार्यशाला के समन्वयक डॉ. मंतोष यादव ने बताया कि एक माह की इस कला कार्यशाला में प्रतिभागियों को ड्राइंग, पेंटिंग, स्टिल लाइफ, लैंडस्केप, क्रिएटिव पेंटिंग, क्राफ्ट तथा अन्य कलात्मक विधाओं का प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला के अंतिम चरण में प्रतिभागियों को मृत्तिका कला से संबंधित क्ले मॉडलिंग एवं पॉटरी निर्माण की तकनीकों से अवगत कराया गया।
क्ले मॉडलिंग एवं पॉटरी निर्माण का प्रशिक्षण सहायक निदेशक जिऊत बली यादव ने दिया। उन्होंने प्रतिभागियों को मिट्टी तैयार करने, आकृति निर्माण, पात्र निर्माण तथा उनके सौंदर्यपरक स्वरूप को विकसित करने की विधियों का व्यावहारिक प्रदर्शन कराते हुए प्रशिक्षण प्रदान किया।