आगरा किला : महाराजा सूरजमल की ऐतिहासिक जीत के 265 साल पूरे, 12 जून को गूंजेगी शौर्यगाथा
आगरा किला : महाराजा सूरजमल की ऐतिहासिक जीत के 265 साल पूरे, 12 जून को गूंजेगी शौर्यगाथा
आगरा, 11 जून । उत्तर प्रदेश के आगरा जिले से सटे राजस्थान में भरतपुर रियासत के नरेश राजा सूरजमल द्वारा 265 वर्ष पूर्व आगरा किले पर की गई जीत की याद में उत्तर प्रदेश सरकार उनके शौर्य को विजय दिवस के रूप में मना कर याद करेगी। 12 जून को आगरा किला परिसर में जहांगीर महल के सामने स्थित लान में विजय दिवस मनाया जाएगा कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह भाग लेंगे।
कार्यक्रम के लिए पर्यटन विभाग को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से मिली अनुमति
उत्तर प्रदेश के आगरा जिले से सटे राजस्थान सीमा में भरतपुर रियासत के नरेश राजा सूरजमल ने 265 वर्ष पूर्व अपने शौर्य, अदम्य साहस और कुशल रणनीति के चलते मुगलिया सल्तनत की सत्ता का गौरव माने जाने वाले आगरा किला को मुगलों से छीन कर अपने कब्जे में ले लिया था। उनकी जीत की याद में उत्तर प्रदेश सरकार 12 जून को आगरा किला परिसर में स्थित जहांगीर महल के लान में उनकी शौर्य गाथाओं को याद करने के लिए कार्यक्रम आयोजित कर रही है। पर्यटन विभाग को आर्कियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया (ए एस आई )से अनुमति मिल गई है। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार की संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह भाग लेंगे।
265 साल पहले जाट राजा ने किया था आगरा किले पर कब्जा-
वरिष्ठ पुरातत्व विद डा0एम सी शर्मा बताते हैं कि राजस्थान के भरतपुर जिले में स्थित डीग के राजा बदन सिंह के पुत्र सूरजमल बड़े ही वीर पराक्रमी और शूरवीर थे, राजा बदन सिंह के बाद वे भरतपुर रियासत के राजा बने।जाट समाज के सबसे शक्तिशाली राजा के रूप में उन्हें महाराजा सूरजमल कहा जाता है।
किले पर कब्जे के लिए सूरजमल ने स्वयं सम्हाली कमान।
डा0शर्मा आगे बताते हैं कि 1707 में औरंगजेब की मृत्यु के बाद मुगल शासन कमजोर हो गया था। ऐसे में महाराजा सूरजमल ने कुशल रणनीति अपनाते हुए आगरा किले पर कब्जा करने के लिए सैन्य टुकड़ी को फ़ौजदार बलराम के नेतृत्व 3 मई सन 1761 को आगरा भेजा। उस वक्त आगरा किले में तकरीबन 400 सैनिक मौजूद थे। 40 दिनों तक भरतपुर से आये सैनिकों ने आगरा किले को घेरे रखा, 4 जून को सूरजमल अलीगढ़ से आगरा पहुंच गए और इस अभियान की कमान स्वयं संभाल ली । विशेष रणनीति को अपनाते हुए उन्होंने किले में मौजूद सैनिकों के आगरा शहर में रह रहे परिजनों को बंदी बना लिया। इस रणनीति के बाद आगरा किले के किलेदार सहित सैनिकों का मनोबल टूट गया और उन्होंने समर्पण कर दिया। 12 जून 1761 को महाराजा सूरजमल ने आगरा किले पर अपना कब्जा कर लिया।
किले पर कब्जे के बाद भरतपुर रियासत हुआ मालामाल-
कब्जे के बाद किलेदार से उनको करीब 50 रूपये रुपए, बेश कीमती जेवरात, तोप खाना, हाथी घोड़े और अन्य बहुमूल्य संपत्ति प्राप्त हुई जिसको उन्होंने भरतपुर भिजवा दिया। किले पर जीत के बाद भरतपुर रियासत की माली हालत बहुत मजबूत हो गई।
13 साल रहा जाट राजाओं का आगरा किले पर कब्जा -
हालांकि 1763 में महाराजा सूरजमल वीर गति को प्राप्त हो गए उनके बाद अन्य जाट शासकों का किले पर कब्जा बरकरार रहा। इसी दौरान आगरा किले में दीवान-ए-आम के पास राजा रतन सिंह की खूबसूरत हवेली भी बनवाई गई। 1774 तक करीब 13 वर्ष जाट राजाओं का किले पर शासन रहा।
13 साल बाद मुग़ल फिर घुस पाए किले में-
25 दिसंबर 1763 में सूरजमल के निधन के बाद जाट राजाओं की पकड़ भी आगरा किले पर कमजोर होती चली गई। मुगल बादशाह शाह आलम ने अपने खास फौजदार मिर्जा नजफ खां को बड़ी फौज के साथ आगरा भेजा जिसने 18 फरवरी 1774 में आगरा किले पर अधिकार कर लिया। इस तरह जाट शासन के 13 साल बाद मुगलों ने पुन अपने गढ़ को वापस ले लिया
विजय दिवस में 700 लोगों को मिलेगी एंट्री-
क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी शक्ति सिंह ने बताया कि महाराजा सूरजमल की आगरा किले पर विजय को लेकर 12 जून को आगरा किला परिसर में जहांगीर महल के सामने स्थित लान में विजय दिवस मनाया जाएगा जिसमें 700 लोगों को प्रवेश के लिए पास के आधार पर व्यवस्था की गई है। कार्यक्रम में उनकी वीरता, शौर्य एवं पराक्रम आधारित शौर्य गाथाओं को लेकर कार्यक्रमों का मंचन भी किया जाएगा। कार्यक्रम में भाग लेने वाले आगंतुकों की ज्यादा संख्या की संभावना को देखते हुए किले के बाहर बड़ी स्क्रीन पर कार्यक्रम को दिखाने की व्यवस्था की जा रही है।
कार्यक्रम को लेकर जाट संगठनों में विशेष उत्साह-
अखिल भारतीय जाट महासभा के जिला अध्यक्ष कप्तान सिंह चाहर ने 12 जून के कार्यक्रम में सभी बृजवासियों को इस गौरवशाली दिन में भाग लेने की अपील की है।
प्रगतिशील जाट महासभा के अध्यक्ष पुरुषोत्तम फौजदार ने बताया कि विजय दिवस के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए लखनऊ के कलाकार मंचन करेंगे। कार्यक्रम में पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह के अलावा कुछ अन्य मंत्रीगण, सांसद,विधायक, जनप्रतिनिधि व अन्य गणमान्य व्यक्ति भाग लेंगे विजय दिवस कार्यक्रम आगरा सहित भरतपुर मथुरा फिरोजाबाद आदि स्थानों से प्रतिनिधि भाग लेंगे। इस कार्यक्रम की पिछले वर्ष भी अनुमति मिल गई थी लेकिन विमान दुर्घटना के कारण इस कार्यक्रम को निरस्त कर दिया गया था।
शिवाजी की वीरगाथाओं का भी गबाह बन चुका है आगरा किला
इसी वर्ष 19 फरवरी को छत्रपति शिवाजी की जयंती के अवसर पर आगरा किले में महाराष्ट्र सरकार की तरफ से उनकी शौर्य गाथाओं का मंचन का उन्हें याद किया गया था, इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री सहित कई गणमान्य लोगों ने भाग लिया था।