गंगा में स्नान करते समय डूबा आन्ध्र प्रदेश का युवक, मौत: आस्था की यात्रा में पसरा मातम

गंगा में स्नान करते समय डूबा आन्ध्र प्रदेश का युवक, मौत: आस्था की यात्रा में पसरा मातम

गंगा में स्नान करते समय डूबा आन्ध्र प्रदेश का युवक, मौत: आस्था की यात्रा में पसरा मातम

प्रयागराज, 13 जुलाई पवित्र नगरी प्रयागराज में आध्यात्मिकता के केंद्र, पवित्र त्रिवेणी संगम के तट पर एक हृदय विदारक घटना सामने आई है, जहाँ गंगा नदी में स्नान के दौरान एक युवा तीर्थयात्री की दुखद मौत हो गई। आन्ध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम से अपने परिवार के साथ संगम स्नान के लिए आए 23 वर्षीय युवक बेथा संथा स्वरूप मनीकान्ता की प्रयागराज के नैनी थाना क्षेत्र के अरैल घाट पर रविवार को गहरे पानी में डूबने से मृत्यु हो गई। यह घटना एक खुशी की धार्मिक यात्रा को मातम में बदल गई, जिससे परिवार और घाट पर मौजूद अन्य श्रद्धालुओं में शोक की लहर दौड़ गई।

पुलिस उपायुक्त यमुनानगर विवेक चन्द्र यादव द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान बेथा संथा स्वरूप मनीकान्ता (23 वर्ष) के रूप में हुई है, जो आन्ध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम जनपद में 4-24 आरएच कॉलोनी, पीएमपाली कॉलोनी का निवासी था। मनीकान्ता अपने पिता बेथा चिनाराव और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ देश के विभिन्न हिस्सों से आए हजारों श्रद्धालुओं की तरह, मोक्ष की कामना और धार्मिक आस्था के साथ पवित्र संगम में डुबकी लगाने के लिए प्रयागराज पहुंचा था। उनका यह दौरा, जो भक्ति और विश्वास से भरा होना था, अचानक एक असहनीय त्रासदी में परिवर्तित हो गया।

रविवार की सुबह अरैल घाट पर स्नान करते समय, मनीकान्ता अनजाने में नदी के उस हिस्से में चला गया जहाँ पानी की गहराई अप्रत्याशित रूप से बढ़ जाती है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब तक आसपास के लोगों को उसकी बेचैनी का एहसास होता और कोई मदद के लिए आगे आ पाता, वह तेजी से गहरे पानी में समाने लगा। उसकी अचानक डूबने की कोशिशों और पानी में संघर्ष को देखकर घाट पर मौजूद अन्य श्रद्धालुओं और परिवार के सदस्यों में हड़कंप मच गया और वे मदद के लिए चीखने-चिल्लाने लगे।

घाट पर मचे शोर और चीख-पुकार को सुनकर, तुरन्त राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और स्थानीय पुलिस की टीमें मौके पर पहुँचीं। उन्होंने तत्काल प्रभाव से स्थानीय गोताखोरों और अनुभवी नाविकों की मदद से मनीकान्ता को खोजने के लिए व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया। कई मिनटों की अथक खोज के बाद, बेथा संथा स्वरूप मनीकान्ता को पानी से बाहर निकाला गया। उसे तुरंत ही जीवन बचाने की आखिरी उम्मीद के साथ स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय ले जाया गया।

दुर्भाग्यवश, अस्पताल पहुंचने से पहले ही मनीकान्ता ने अपनी अंतिम सांस ले ली थी। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया, जिससे उसके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उनकी खुशी की यात्रा एक गहरे शोक में बदल गई। पुलिस टीम ने आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा करते हुए शव का पंचनामा किया और उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है ताकि मौत के कारणों की पुष्टि हो सके। इस दुखद घटना ने एक बार फिर गंगा नदी में स्नान करते समय बरती जाने वाली सावधानियों के महत्व को रेखांकित किया है, विशेषकर उन स्थानों पर जहाँ पानी की गहराई का अनुमान लगाना मुश्किल होता है। स्थानीय प्रशासन ने घाटों पर सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया है ताकि ऐसी दुखद घटनाओं को भविष्य में रोका जा सके।