प्रधानों को प्रशासक बनाने के मामले में सुनवाई छह सप्ताह बाद

प्रधानों को प्रशासक बनाने के मामले में सुनवाई छह सप्ताह बाद

प्रधानों को प्रशासक बनाने के मामले में सुनवाई छह सप्ताह बाद

प्रयागराज, 13 जुलाई । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के मामले की याचिका पर सुनवाई छह सप्ताह के लिए टाल दी है। न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने सोमवार को कहा कि इसी समान मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में दो न्यायाधीशों की बेंच कर रही है। ऐसी स्थिति में इस स्तर पर एकल पीठ में सुनवाई संभव नहीं है।

पिछली सुनवाई पर न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने अरविंद राठौर की याचिका पर सुनवाई करते हुए गत 25 मई और 26 मई के उन सरकारी आदेशों पर सवाल उठाया था, जिनसे चुनाव टाले गए थे। न्यायालय ने कहा था कि ये आदेश अधिनियम 1947 की धारा 12 (3-ए) के तहत किए गए थे, जिसे प्रमोद लाल पटेल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य में दो न्यायाधीशों की खंडपीठ ने पहले ही असंवैधानिक घोषित कर दिया था।

न्यायालय ने कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 243 ई और 243 के के तहत पंचायतों का कार्यकाल पांच साल का निश्चित होता है और चुनाव समय पर होने चाहिए। राज्य सरकार ने ओबीसी आयोग की रिपोर्ट लंबित होने को देरी का कारण बताया, जिस पर कोर्ट ने हैरानी जताई कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद ओबीसी आयोग ने अब तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की है। राज्य निर्वाचन आयोग ने बताया कि मतदाता सूची गत 10 जून को प्रकाशित हो चुकी है और आयोग चुनाव कराने को तैयार है लेकिन राज्य सरकार से आवश्यक लॉजिस्टिक्स न मिलने के कारण चुनाव में बाधा आ रही है।