उत्तर मध्य रेलवे में हर बूंद सहेजने की पहल, 124 वर्षा जल संचयन संरचनाएं तैयार
आगरा में 38, प्रयागराज मंडल में 41 और झांसी मंडल में 45 संरचनाएं तैयार; पुराने कुओं और सूखे बोरवेल को भी भूजल रिचार्ज के लिए किया जा रहा इस्तेमाल।
प्रयागराज, 24 सितंबर । बारिश के पानी को व्यर्थ बहने से रोकने और भूजल स्तर बढ़ाने के लिए उत्तर मध्य रेलवे ने अपने परिसरों में वर्षा जल संचयन की व्यवस्था को विस्तार दिया है। रेलवे के विभिन्न भवनों और खुले क्षेत्रों में अब तक 124 वर्षा जल संचयन संरचनाएं तैयार की जा चुकी हैं। इनमें आगरा मंडल में 38, प्रयागराज मंडल में 41 और झांसी मंडल में 45 संरचनाएं शामिल हैं।
उत्तर मध्य रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी अमित मालवीय ने बताया कि रेलवे परिसरों में बारिश के पानी को बहकर निकलने देने के बजाय उसे एकत्र कर फिल्टर किया जा रहा है। इसके बाद पाइप के माध्यम से रिचार्ज पिट, सोक पिट, पुराने कुओं, सूखे बोरवेल और डीप बोर जैसी संरचनाओं तक पहुंचाया जा रहा है। इससे वर्षा जल धीरे-धीरे जमीन में पहुंचकर भूजल पुनर्भरण में मदद करता है।
उन्होंने बताया कि सभी स्थानों पर एक जैसी व्यवस्था नहीं अपनाई गई है। स्थानीय परिस्थितियों, उपलब्ध स्थान और रेलवे की मौजूदा परिसंपत्तियों के अनुसार रिचार्ज की अलग-अलग तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। कई स्थानों पर पहले से मौजूद कुओं और बोरवेल को ही वर्षा जल पुनर्भरण के लिए उपयोग में लाया जा रहा है।
झांसी मंडल में पुराने कुएं और सूखे बोरवेल बने सहारा
झांसी मंडल के महोबा, पामां, मलासा, आटा, भुआ, मोंठ, चिरगांव, परिछा, झांसी और ग्वालियर सहित कई स्थानों पर वर्षा जल संचयन की व्यवस्था की गई है। महोबा में छत से आने वाले पानी को पुराने कुएं तक पहुंचाया जा रहा है। पामां में सूखे बोरवेल का इस्तेमाल किया जा रहा है। मलासा और आटा में जलतारा व सोक पिट आधारित व्यवस्था अपनाई गई है। झांसी में रेलवे कॉलोनियों, बीटीसी, एसी लोको शेड समेत अन्य परिसरों में रिचार्ज व्यवस्था बनाई गई है।
प्रयागराज मंडल में 41 संरचनाएं
प्रयागराज मंडल में प्रयागराज, कानपुर, इटावा, फिरोजाबाद, हाथरस, दादरी, दनकौर, चुनार, लूसा और खैराही सहित विभिन्न स्थानों पर वर्षा जल संचयन की व्यवस्था की गई है। भवनों की छतों और अन्य उपयुक्त सतहों से पानी को पाइप और फिल्ट्रेशन व्यवस्था के जरिए रिचार्ज संरचनाओं तक पहुंचाया जाता है। तकनीकी रूप से उपयुक्त स्थानों पर डीप बोर और बोरवेल को भी रिचार्ज प्वाइंट बनाया गया है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, कई स्थानों पर पानी को सीधे जमीन में उतारने के बजाय पहले फिल्टर और फर्स्ट फ्लश व्यवस्था से गुजारा जाता है। इससे वर्षा जल को नियंत्रित तरीके से जमीन में पहुंचाने में मदद मिलती है। रेलवे का उद्देश्य वर्षा जल के बहाव को कम करने के साथ ही उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देना है।