लखनऊ विश्वविद्यालय में ‘विकसित भारत@2047’ पर व्याख्यान, सुशासन और जन-केंद्रित नीतियों पर मंथन

लोक प्रशासन विभाग के कार्यक्रम में पूर्व मुख्य सचिव डॉ. अनूप चंद्र पांडेय ने प्रशासनिक सुधार, आपदा प्रबंधन और राष्ट्र निर्माण के पहलुओं पर विचार साझा किए।

लखनऊ विश्वविद्यालय में ‘विकसित भारत@2047’ पर व्याख्यान, सुशासन और जन-केंद्रित नीतियों पर मंथन

लखनऊ, 24 सितंबर। लखनऊ विश्वविद्यालय के लोक प्रशासन विभाग में गुरुवार काे “किस्सा प्रशासन का :अध्याय 1 – विकसित भारत@2047” विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि तथा दीप प्रज्वलन के साथ हुई। कार्यक्रम का केंद्रीय विषय जन नीतियाँ व संभावनाएँ रहा। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. अनूप चंद्र पांडेय, सेवानिवृत्त आईएएस एवं पूर्व मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन रहे।

जननीतियाँ व संभावनाएँ विषय की परिचर्चा एवं भूमिका रखते हुए विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर वैशाली सक्सेना ने किस्सा प्रशासन के अध्याय प्रथम (आपदा प्रबंधन) के बारे में जिक्र करते हुए उसके रेसिलियंस पर ध्यान आकर्षित किया कार्यक्रम का उद्देश्य विकसित भारत@2047 के संकल्प को साकार करने में सुशासन, प्रभावी प्रशासन, जन-केंद्रित नीतियों तथा प्रशासनिक नवाचार की भूमिका पर अकादमिक विमर्श को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम में प्रशासन एवं शासन व्यवस्था के बदलते स्वरूप, नागरिक-केंद्रित प्रशासन तथा भारत के दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों पर विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर जेपी सैनी के संरक्षण में आयाेजित किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. अनूप चंद्र पांडेय पूर्व मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश ने अपने विस्तृत प्रशासनिक अनुभव के आधार पर सुशासन, सार्वजनिक नीति, प्रशासनिक सुधार और राष्ट्र निर्माण के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में प्रशासन की भूमिका, नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा नागरिकों की सक्रिय भागीदारी के महत्व को रेखांकित किया उन्होंने 1993 में अल्मोड़ा आपदा को केस स्टडी के तौर पर प्रस्तुत किया । कार्यक्रम के अध्यक्षता करते हुए प्रो. अरविंद मोहन, अधिष्ठाता, कला संकाय ने अपने निजी अनुभवों को साझा किया और बच्चो को किस्से के माध्यम से सिखाने पर बल दिया।

व्याख्यान के दौरान समावेशी, कुशल, उत्तरदायी एवं जवाबदेह शासन को विकसित भारत की आधारशिला बताते हुए सार्वजनिक प्रशासन में पारदर्शिता, जनभागीदारी, नवाचार और सेवा-प्रदाय की गुणवत्ता को महत्वपूर्ण बताया गया। वक्ताओं ने इस बात पर भी चर्चा की कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में जन-केंद्रित नीतियों और प्रभावी प्रशासनिक संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

कार्यक्रम के दौरान “अच्छे शासन से विकसित भारत की ओर” की भावना को रेखांकित करते हुए सुशासन, सशक्त नागरिक और विकसित भारत के बीच अंतर्संबंधों पर विशेष चर्चा की गई। इसमें विभाग के प्रोफेसर नंदलाल भारती, डॉ नंदिता कौशल ,डॉ सुशील चौहान , डॉ अमन सिंह, डाॅ राजेश कुमार, शोधार्थी और बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे । कार्यक्रम का संचालन कौशाम्बी सिंह तोमर द्वारा किया गया। विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए यह व्याख्यान प्रशासनिक अनुभव एवं समकालीन शासन की चुनौतियों को समझने का महत्वपूर्ण अवसर रहा।यह प्रोग्राम लोक प्रशासन विभाग के अटल सुशासन पीठ की तरफ से आयोजित किया गया था। विभाग और पीठ की तरफ से अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए डॉ सुशील सिंह चौहान ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया ।