विद्यार्थियों को आधुनिक एआई तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण समय की आवश्यकता : डॉ. पुष्पा ममोरिया

विद्यार्थियों को आधुनिक एआई तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण समय की आवश्यकता : डॉ. पुष्पा ममोरिया

विद्यार्थियों को आधुनिक एआई तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण समय की आवश्यकता : डॉ. पुष्पा ममोरिया

कानपुर, 07 जुलाई । वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षा, उद्योग, अनुसंधान और रोजगार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। ऐसे में विद्यार्थियों को आधुनिक एआई तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना समय की आवश्यकता है। विद्यार्थियों को इस कार्यशाला का अधिकतम लाभ उठाना चाहिए। यह बातें मंगलवार को छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कंप्यूटर एप्लीकेशन विभागाध्यक्ष डॉ. पुष्पा ममोरिया ने कहीं।

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कंप्यूटर एप्लीकेशन विभाग में आज से बीसीए प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए पांच दिवसीय एआई टूल्स कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता और जनरेटिव एआई की आधुनिक तकनीकों से परिचित कराना तथा विभिन्न एआई टूल्स का व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है।

कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को चैटजीपीटी, गूगल जेमिनी, परप्लेक्सिटी एआई, कैनवा एआई, गामा एआई, टोम एआई, नैपकिन एआई और ल्यूमेन5 जैसे अत्याधुनिक एआई टूल्स के उपयोग की जानकारी दी जा रही है। इसके साथ ही प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग, एआई आधारित कंटेंट क्रिएशन, प्रेजेंटेशन एवं पोस्टर डिजाइन, वीडियो निर्माण तथा अकादमिक शोध में एआई के प्रभावी उपयोग पर विशेषज्ञों द्वारा व्यावहारिक सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।

कार्यशाला के समन्वयक डॉ. आलोक कुमार, निदेशक, यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (यूआईईटी) एवं एसोसिएट प्रोफेसर, कंप्यूटर साइंस तथा डॉ. पुष्पा ममोरिया, विभागाध्यक्ष एवं एसोसिएट प्रोफेसर, कंप्यूटर एप्लीकेशन विभाग हैं। सह-समन्वयक एवं प्रशिक्षक के रूप में सहायक आचार्य सुश्री शगूफ़ी अंजुम तथा प्रशिक्षक के रूप में कृष्णा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के सहायक आचार्य श्री अश्विनी शाक्य प्रशिक्षण दे रहे हैं।

कार्यशाला में बड़ी संख्या में बीसीए प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और एआई टूल्स के व्यावहारिक उपयोग को लेकर विशेष रुचि दिखाई। पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों को ई-प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे।> केवल संस्थानों के आधिकारिक नाम (जैसे यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी) को वैसे ही रखा गया है, क्योंकि वे संस्थान का आधिकारिक नाम हैं। बाकी अंग्रेज़ी शब्दों को हिंदी/हिंदी लिप्यंतरण में बदल दिया गया है।