चित्रकूट में बाढ़ का पानी उतरने के बाद जनजीवन पटरी पर, युद्ध स्तर पर सफाई-राहत कार्य जारी; नुकसान का सर्वे तेज

मुख्य सड़कों से गाद और मलबा हटाकर आवागमन बहाल किया गया। प्रशासन की टीमें पेयजल, स्वास्थ्य, भोजन और राहत सामग्री पहुंचाने के साथ प्रभावित घरों व गलियों की सफाई में जुटी हैं।

चित्रकूट में बाढ़ का पानी उतरने के बाद जनजीवन पटरी पर, युद्ध स्तर पर सफाई-राहत कार्य जारी; नुकसान का सर्वे तेज

सतना, 5 सितंबर। मध्य प्रदेश के सतना जिले के चित्रकूट में हाल ही में आई भीषण बाढ़ के बाद अब जनजीवन धीरे-धीरे सामान्य होने लगा है। बाढ़ के दौरान मुख्य सड़कों और प्रभावित इलाकों में जमा गाद एवं मलबा हटाने के बाद आवागमन बहाल हो गया है। जिला प्रशासन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार मौजूद रहकर साफ-सफाई, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधा, भोजन और आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराने में जुटी हैं।

कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस के मार्गदर्शन में पुलिस अधीक्षक हंसराज सिंह, अपर कलेक्टर विकास सिंह, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी शैलेंद्र सिंह, एसडीएम महिपाल सिंह गुर्जर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी राहत और पुनर्वास कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। प्रशासन का जोर प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने के साथ शहर और ग्रामीण क्षेत्रों की मूलभूत व्यवस्थाओं को जल्द बहाल करने पर है।

गलियों और घरों से हटाया जा रहा मलबा

मुख्य मार्गों की सफाई के बाद अब चित्रकूट की गलियों और बाढ़ प्रभावित घरों से गाद, कचरा एवं मलबा हटाने का अभियान चलाया जा रहा है। गऊघाट मार्ग, पुराने लंका तिराहा, पुरानी तहसील क्षेत्र और भरत घाट सहित अन्य इलाकों में मशीनों एवं ट्रैक्टरों की सहायता से सफाई की जा रही है।

बाढ़ के बाद संक्रमण और जलजनित बीमारियों की आशंका को देखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव तथा सैनिटाइजेशन कराया जा रहा है। नयागांव सहित विभिन्न क्षेत्रों में दवा का छिड़काव भी जारी है।

पेयजल को लेकर विशेष सतर्कता

प्रशासन ने लोगों से स्वच्छता बनाए रखने और केवल सुरक्षित पेयजल का उपयोग करने की अपील की है। चित्रकूट के प्रभावित क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल के कैंपर वितरित किए जा रहे हैं। लसूरिया और आसपास के डूब प्रभावित क्षेत्रों में भी पेयजल तथा आवश्यक सामग्री पहुंचाई जा रही है।

हैंडपंपों में जर्मेक्स डालने और क्लोरीनेशन का काम लगातार किया जा रहा है। कार्यपालन यंत्री श्वेतांक चौरसिया की मौजूदगी में प्रभावित क्षेत्रों के हैंडपंपों में जर्मेक्स डालकर ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल इस्तेमाल करने के लिए जागरूक किया गया। रामपुर बघेलान जनपद की ग्राम पंचायत किचवरिया में हैंडपंपों का क्लोरीनेशन किया गया तथा ग्रामीणों की मांग पर कुओं के लिए जर्मेक्स उपलब्ध कराया गया। झरी और जैतवारा में भी जल जागरूकता एवं क्लोरीनेशन अभियान चलाया गया।

हनुमान धारा रोड पुल के पास जल आवर्धन योजना के इंटेक वेल की पाइप चोक होने से प्रभावित जलापूर्ति को सुचारु करने के लिए सुधार कार्य कराया जा रहा है। इस कार्य में एनडीआरएफ की टीम भी सहयोग कर रही है।

राहत सामग्री के लिए बनाया गया संग्रहण केंद्र

बाढ़ प्रभावित परिवारों की मदद के लिए विभिन्न संस्थाओं, कंपनियों, जनप्रतिनिधियों और आम लोगों से लगातार राहत सामग्री प्राप्त हो रही है। सामग्री के सुरक्षित एवं व्यवस्थित भंडारण के लिए कामतानाथ जी के पास वन विभाग के बड़े गोदाम को संग्रहण केंद्र बनाया गया है। यहां राहत सामग्री को जरूरत के अनुसार व्यवस्थित कर प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जा रहा है।

सद्गुरु, डीआरआई, दीनदयाल रसोई, संतोषी अखाड़ा, आचार्य आश्रम सहित विभिन्न संस्थाएं राहत एवं सेवा कार्यों में सहयोग कर रही हैं। जन अभियान से जुड़े स्वयंसेवक भी प्रशासन के साथ राहत कार्यों में जुटे हैं।

नगर परिषद चित्रकूट के दूरस्थ मोहल्ले बटोही और सती अनुसुइया क्षेत्र के 62 परिवारों को प्रारंभिक राहत के रूप में कंबल, आलू, मोमबत्ती, माचिस, सूखे कपड़े और स्नैक्स वितरित किए गए हैं।

राहत भोजन की गुणवत्ता पर अधिकारियों की नजर

बाढ़ प्रभावितों के लिए संचालित राहत रसोई में तैयार भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। प्रभावित परिवारों तक भोजन भेजने से पहले अधिकारी स्वयं उसकी गुणवत्ता की जांच कर रहे हैं। जांच के बाद ही भोजन के पैकेट वितरण के लिए भेजे जा रहे हैं।

प्रशासन ने सामाजिक संस्थाओं और समाजसेवियों से अपील की है कि दूर से तैयार पका हुआ भोजन लाकर सीधे वितरित न करें। लंबे समय तक परिवहन के दौरान भोजन खराब होने की आशंका रहती है। बाहर से पका भोजन लाने वाली संस्थाएं पहले स्थानीय प्रशासन को सूचना दें और गुणवत्ता जांच के बाद ही उसका वितरण करें। प्रशासन ने सूखा खाद्यान्न अथवा अन्य खाद्य सामग्री स्थानीय राहत रसोई को उपलब्ध कराने को अधिक उपयोगी बताया है। यह भी स्पष्ट किया गया है कि नगर परिषद एवं जिला प्रशासन द्वारा तैयार भोजन के पैकेट पॉलीथिन में पैक नहीं किए जा रहे हैं।

क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत जारी

बाढ़ से क्षतिग्रस्त मार्गों और जल निकासी व्यवस्था को भी बहाल किया जा रहा है। तहसीलदार ज्योति पटेल एवं सीएमओ पंजाब सिंह की मौजूदगी में जैतवारा-कुलकड़िया मार्ग का निरीक्षण किया गया। खुटहा नहर से कच्चा माल लाकर क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत कराई जा रही है। खुटहा-मरवा के बीच करियापानी नाला भी क्षतिग्रस्त हुआ है, जिसके सुधार की कार्रवाई जारी है।

ग्राम खदोरा में जलभराव के कारण बाधित मार्ग पर लोक निर्माण विभाग ने सतही नाली बनाकर पानी निकासी की व्यवस्था की, जिससे आवागमन बहाल करने में मदद मिली। सोहावल की ग्राम पंचायत खड़ौरी में भी क्षतिग्रस्त सड़क को आवागमन योग्य बनाने के लिए सुधार एवं मरम्मत कार्य कराया जा रहा है।

नुकसान का सर्वे तेज

बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का संयुक्त सर्वे भी तेजी से कराया जा रहा है। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के संविदाकार ने भी बाढ़ प्रभावित लोगों की सहायता के लिए आवश्यक सामग्री जुटाई है।

कलेक्टर ने जिले के राजस्व अधिकारियों, कृषि विभाग और स्थानीय निकायों के अधिकारियों को जल्द से जल्द नुकसान का सर्वे पूरा कर पात्र प्रभावित परिवारों को राहत सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन के अनुसार सफाई, पेयजल, स्वास्थ्य, सड़क, जल निकासी, भोजन वितरण और राहत सामग्री से जुड़े कार्यों को एक साथ गति दी जा रही है। विभागीय अमले, सामाजिक संस्थाओं और आमजन के समन्वित प्रयासों से चित्रकूट बाढ़ की त्रासदी से उबरते हुए सामान्य स्थिति की ओर बढ़ रहा है।