भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय का 16वां दीक्षांत समारोह संपन्न, 255 पदकों के साथ गूंजा संस्कृति का स्वर
भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय का 16वां दीक्षांत समारोह संपन्न, 255 पदकों के साथ गूंजा संस्कृति का स्वर
लखनऊ, 15 जुलाई । भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ के 16वें दीक्षांत समारोह में बुधवार को शिक्षा, संस्कृति, संगीत और सामाजिक सरोकारों का अनूठा संगम देखने को मिला। कैसरबाग स्थित कलामण्डपम् प्रेक्षागृह में आयोजित समारोह में शिक्षण सत्र 2025-26 के कुल 23 मेधावी विद्यार्थियों को विभिन्न स्वर्ण, रजत और कांस्य पदकों से सम्मानित किया गया। एम.पी.ए. (कथक) की छात्रा श्वेता गुप्ता सर्वाधिक सात स्वर्ण पदक प्राप्त कर समारोह का मुख्य आकर्षण रहीं। इसके साथ ही विश्वविद्यालय की उपलब्धियों, सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।
पदक विजेताओं में एम.पी.ए. (कथक) की रूनझुन सिंह को दो रजत पदक तथा एम.पी.ए. (गायन) के छात्र स्पर्श कुमार कश्यप को एक कांस्य और तीन स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। बी.पी.ए. (कथक) की वल्लरी नारायण पाठक और तनिष्का सक्सेना को दो-दो पदक मिले, जबकि बी.पी.ए. (तबला) के छात्र आलोक कुमार मिश्रा को चार पदकों से सम्मानित किया गया। नेहा काजी को गिटार विभाग में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पांच स्वर्ण पदक और प्रिया दुबे को गायन विभाग में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने पर चार पुरस्कार प्रदान किए गए। भरतनाट्यम की छात्रा दीप्ति सिंह को तीन स्वर्ण पदक तथा नाट्यकला में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने पर करतुम्म तरैया को पद्मश्री प्रो. राज बिसारिया स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।
समारोह के दौरान विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांवों में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के छह विजेताओं को भी पुरस्कार प्रदान किए गए। प्राथमिक विद्यालय कटिंगरा, लखनऊ की प्रधानाचार्याएं पूजा सक्सेना और नम्रता मिश्रा को पुस्तकें भेंट कर सम्मानित किया गया। कुलाधिपति की प्रेरणा से जनभवन स्कूल के बच्चों को ज्ञानवर्धक पुस्तकें और लेखन सामग्री वितरित की गई। इसके अलावा चिन्हित जनपदों के पांच आंगनबाड़ी केंद्रों को 300 किट प्रदान की गईं। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की पत्रिका तथा प्रो. सृष्टि माथुर की पुस्तक ‘संगीत सृष्टि’ का भी विमोचन किया गया।
विश्वविद्यालय की कुलाधिपति और उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के प्रतिनिधि के रूप में समारोह में उपस्थित राज्यपाल के विशेष कार्यकारी अधिकारी (रिटायर्ड अपर मुख्य सचिव) सुधीर एम. बोबडे ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री और पदक देने का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कृति और मूल्यों को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष कुल 255 पदक वितरित किए गए हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे पदकों के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत को भी आगे लेकर जाएं।
समारोह के मुख्य अतिथि पद्मश्री से सम्मानित प्रख्यात तबला वादक पंडित कुमार बोस ने भारतीय शास्त्रीय संगीत की गहराई पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंदुस्तानी संगीत नव रसों पर आधारित है। इन रसों को आत्मसात किए बिना संगीत की वास्तविक अनुभूति संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि कलाकार जब भारतीय संस्कृति, संवेदनाओं और जीवन मूल्यों को भीतर से महसूस करता है, तभी वह भारतीय संगीत की आत्मा तक पहुंच पाता है।
समारोह के विशिष्ट अतिथि प्रदेश के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने विश्वविद्यालय के गोद लिए गए गांवों के प्रतिभाशाली बच्चों को पुरस्कृत किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1926 में एक छोटे से संगीत विद्यालय के रूप में शुरू हुई यह संस्था वर्ष 2022 में पूर्ण विश्वविद्यालय के रूप में विकसित हुई और आज देश की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहरों में शामिल है। उन्होंने कहा कि वितरित पदकों में 28 पदक महिला विद्यार्थियों को प्राप्त हुए हैं, जो महिला सशक्तिकरण का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने विद्यार्थियों से ‘नेशन फर्स्ट’ की भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान करते हुए कहा कि युवाओं की सकारात्मक भागीदारी से ही वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. माण्डवी सिंह ने कहा कि संस्थान को देश की महान विभूतियों का निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग प्राप्त होता रहा है, जिसके कारण विश्वविद्यालय नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष पहली बार विश्वविद्यालय के तीन विद्यार्थियों का जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ) के लिए पंजीकरण हुआ है, जो संस्थान की बढ़ती शैक्षणिक और शोध क्षमता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय भारतीय संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक अध्ययन के क्षेत्र में उत्कृष्टता का राष्ट्रीय केंद्र बनने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।
समारोह में अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात, संस्कृति विभाग की विशेष सचिव दीपा रंजन, कुल सचिव सुशील प्रताप सिंह सहित अनेक गणमान्य अतिथि, शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।