हाईकाेर्ट : फर्जी रिमांड आदेश मामले में वकील समेत कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश
हाईकाेर्ट : फर्जी रिमांड आदेश मामले में वकील समेत कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश
प्रयागराज, 08 जुलाई । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बांदा जिले के एक हत्या मामले में दोषी ठहराए गए अपीलकर्ता चुनुबाद को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति चवन प्रकाश की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया।
मामला 1986 का है, जब बांदा के कमासिन थाना क्षेत्र में सहेंद्रपाल नामक व्यक्ति का अपहरण कर उसकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी और शव को जला दिया गया था। ट्रायल कोर्ट ने केदार, बहादुर और चुनुबाद को धारा 148, 364, 302 और 201 आईपीसी के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अपील के दौरान केदार और बहादुर की मृत्यु हो गई, जिसके बाद यह अपील केवल चुनुबाद तक सीमित रह गई।
उच्च न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष के दोनों प्रत्यक्षदर्शी गवाह राजेश और भोला मृतक के रिश्तेदार थे और दोनों परिवार के बीच पुरानी आपराधिक रंजिश का इतिहास था, जिससे वे "हितबद्ध गवाह" की श्रेणी में आते हैं। अदालत ने यह भी नोट किया कि घटना स्थल तक गवाहों के साथ गए अन्य स्वतंत्र गवाहों महेश और राज करण को अभियोजन ने पेश नहीं किया, जो पुष्टिकारक साक्ष्य के अभाव को दर्शाता है।
न्यायालय ने घटनाक्रम को भी अविश्वसनीय पाया हथियारबंद अपराधियों द्वारा धमकी देने के बावजूद गवाहों का पीछा करना और अपराधियों का उन्हें जीवित छोड़ देना स्वाभाविक व्यवहार नहीं लगता। इन परिस्थितियों के आधार पर अदालत ने माना कि गवाहों की घटनास्थल पर मौजूदगी ही संदिग्ध है, जिससे पूरा अभियोजन पक्ष कमजोर पड़ गया।
न्यायालय ने अपील स्वीकार करते हुए निचली अदालत का फैसला रद्द कर दिया और चुनुबाद को सभी आरोपों से बरी
कर दिया।