वाराणसी: नौतपा से बचाव के लिए काशी विश्वनाथ धाम में लगे जर्मन हैंगर व कैनोपी
छोटे बच्चों एवं परिवार सहित आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बिस्कुट वितरण की व्यवस्था
वाराणसी, 25 मई । अधिक ज्येष्ठ मास में भीषण ताप के साथ नौतपा काल की शुरूआत सोमवार से हो गई। इसको देखते हुए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने श्री काशी विश्वनाथ धाम में दर्शनार्थ आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा एवं स्वास्थ्य संरक्षण के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की हैं। मंदिर न्यास की ओर से श्रद्धालुओं को भीषण गर्मी से राहत प्रदान करने के उद्देश्य से धाम परिसर एवं कतार मार्ग के विभिन्न स्थलों पर जर्मन हैंगर एवं कैनोपी की व्यवस्था की गई हैं। इसके अतिरिक्त टेंसाइल स्ट्रक्चर के भीतर मिस्ट फैन स्थापित किए गए हैं, जिससे श्रद्धालुओं को शीतल वातावरण उपलब्ध हो सके।
मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉ विश्वभूषण ने सोमवार को बताया कि विशेष रूप से छोटे बच्चों एवं परिवार सहित आने वाले श्रद्धालुओं की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए बच्चों के लिए बिस्कुट वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। साथ ही श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य संरक्षण के लिए विभिन्न स्थानों पर ओआरएस, ग्लूकोज एवं गुड़ की उपलब्धता भी कराई गई है, ताकि गर्मी एवं निर्जलीकरण से बचाव किया जा सके।
उन्होंने बताया कि धाम परिसर में कुल 19 स्थानों पर शुद्ध एवं शीतल पेयजल के वाटर कूलर एवं 10 स्थानों पर पोर्टबल वाटर काउंटर की व्यवस्था सुनिश्चित कराई गई है। कतारबद्ध होकर दर्शन की प्रतीक्षा कर रहे श्रद्धालुओं के लिए उच्च गुणवत्ता वाले जूट मैट बिछाए गए हैं, जिससे उन्हें गर्म फर्श से राहत मिल सके। इसके अतिरिक्त संपूर्ण धाम क्षेत्र में निरंतर स्वच्छता बनाए रखने के लिए सफाई कार्मिकों की तैनाती की गई है तथा नियमित साफ-सफाई एवं सैनिटाइजेशन का कार्य लगातार संचालित किया जा रहा है।
सीईओ डॉ विश्वभूषण ने बताया कि नौतपा काल, जो 25 मई सोमवार 2026 से प्रारंभ होकर आगामी अवधि 2 जून 2026 तक रहेगा, के दौरान भगवान श्री काशी विश्वनाथ का विशेष श्रृंगार एवं अभिषेक विभिन्न फलों के रस एवं शीतल पेय पदार्थों से संपन्न कराया जाएगा। यह आयोजन श्रद्धा, भक्ति एवं सनातन परंपरा के अनुरूप संपन्न होगा। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास सभी श्रद्धालुओं से अपील करता है कि धाम में दर्शन के दौरान प्रशासन एवं मंदिर कर्मियों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें तथा संयम एवं श्रद्धा के साथ बाबा श्री काशी विश्वनाथ के दर्शन का पुण्य लाभ प्राप्त करें।
बताते चलें कि सूर्य देव के सोमवार काे रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करने के साथ ही नौतपा शुरू हो चुका है। हिंदू पंचांग के अनुसार, नौतपा साल के वे 9 दिन होते हैं, जब भीषण गर्मी पड़ती है। इस दौरान सूर्य देव पृथ्वी के सबसे नजदीक होते हैं। जिससे तापमान अपने चरम पर पहुंच जाता है। सूर्यदेव इस नक्षत्र में कुल 15 दिनों तक रहते हैं, लेकिन शुरुआती 9 दिनों में सूर्य का प्रभाव सबसे खतरनाक होता है, इसलिए इसे नौतपा कहा जाता है।-