गीता के संदेश से युवा बन सकते हैं आत्मविश्वासी और आत्मानुशासित : प्रो बी महादेवन
गीता के संदेश से युवा बन सकते हैं आत्मविश्वासी और आत्मानुशासित : प्रो बी महादेवन
कानपुर, 14 मार्च । आधुनिक जीवन में युवा परिणामों के दबाव, प्रतिस्पर्धा और तुलना की मानसिकता से घिरा हुआ है। ऐसे माहौल में आत्मविश्वास अक्सर बाहरी उपलब्धियों पर निर्भर हो जाता है, जबकि गीता का संदेश है कि मनुष्य स्वयं अपने उत्थान और पतन का कारण है। यह बातें शनिवार को आईआईएम बेंगलुरु के प्रोफेसर बी. महादेवन ने कहीं।
श्रीमद भगवद गीता एवं वैदिक शोध पीठ, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय और कॉलेज ऑफ वोकेशनल स्टडीज, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में भगवद गीता के परिप्रेक्ष्य में युवा सशक्तिकरण” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन कॉलेज ऑफ वोकेशनल स्टडीज, नई दिल्ली में किया गया।
मुख्य अतिथि प्रोफेसर बी. महादेवन ने कहा कि आज के समय में सफलता को केवल अंक, पद और आर्थिक उपलब्धियों से मापा जाने लगा है। इस कारण युवाओं की मानसिकता अस्थिर हो जाती है, जहां सफलता मिलने पर उत्साह और असफलता मिलने पर निराशा हावी हो जाती है। उन्होंने कहा कि गीता आत्मअनुशासन और आत्मसंयम का संदेश देती है। जब युवा अपने समय, विचारों और इच्छाओं पर नियंत्रण करना सीखता है, तभी वह वास्तविक अर्थों में सशक्त बनता है।
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता गरुड़ प्रकाशन, गुरुग्राम के सीईओ और विद्वान डॉ. संक्रांत सानू ने कहा कि युवा केवल व्यक्तिगत सफलता का प्रतीक नहीं, बल्कि राष्ट्र की आशा और शक्ति है। उन्होंने कहा कि गीता का “स्वधर्म” सिद्धांत युवाओं को अपनी प्रकृति, रुचि और क्षमता के अनुसार कार्य करने की प्रेरणा देता है। जब युवा अपने स्वभावानुकूल क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करता है, तब वह आत्मनिर्भर बनता है और राष्ट्र निर्माण में योगदान देता है।
श्रीमद भगवद गीता एवं वैदिक शोध पीठ, कानपुर के सह-निदेशक अनिल गुप्ता ने बताया कि छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक की प्रेरणा से 20 दिसंबर 2023 को स्वामी गुरु शरणानंद जी के कर कमलों से शोध पीठ की स्थापना हुई। इसका उद्देश्य युवाओं के बीच गीता के संदेश को अकादमिक रूप में पहुंचाना है।
संगोष्ठी में विद्यार्थियों ने वक्ताओं से अनेक प्रश्न पूछे, जिनका उन्होंने विस्तार से उत्तर दिया। कार्यक्रम में कॉलेज के प्राचार्य प्रो. शिवकुमार सहदेव ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि डॉ. आनंद कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया।