हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी, हिरासत एवं रिमांड को असंवैधानिक घोषित कर तत्काल रिहाई का निर्देश दिया

हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी, हिरासत एवं रिमांड को असंवैधानिक घोषित कर तत्काल रिहाई का निर्देश दिया

हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी, हिरासत एवं रिमांड को असंवैधानिक घोषित कर तत्काल रिहाई का निर्देश दिया

प्रयागराज, 23 जून । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गुजरात पुलिस द्वारा कपिल चुघ की गिरफ्तारी को अवैध करार देते हुए उन्हें तत्काल रिहा करने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।

याचिकाकर्ता कपिल चुघ को पहले गुजरात पुलिस ने 20 अप्रैल 2026 को केंद्रीय जी एस टी एक्ट की धारा 132(1) और 132(5) के तहत गिरफ्तार किया था और वे साबरमती केंद्रीय जेल, अहमदाबाद में बंद थे। इसके बाद 8 मई 2026 को उत्तर प्रदेश के कासना पुलिस स्टेशन (गौतम बुद्ध नगर) ने उन्हें बी-वारंट के आधार पर गौतम बुद्ध नगर की अदालत में पेश किया। जिन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी मेमो नहीं दिया गया, न याची को, न उनके बेटे को, न उनके वकील को। साथ ही गिरफ्तारी के आधार नहीं बताए गए, न लिखित रूप में, न मौखिक रूप में। परिजनों को सूचित भी नहीं किया गया। यह सुप्रीम कोर्ट के विहान कुमार बनाम हरियाणा राज्य (2025) के फैसले का खुला उल्लंघन है।

कोर्ट ने कहा गुजरात से उत्तर प्रदेश लाते समय किसी मजिस्ट्रेट से ट्रांजिट रिमांड नहीं लिया गया। न्यायालय ने कहा कि केंद्रीय जीएसटी अधिनियम एक संपूर्ण संहिता है, जब उसके तहत अभियोजन चल रहा हो तो पुलिस द्वारा बीएनएस के तहत दूसरा मामला दर्ज करना उचित नहीं।

राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि याची कानून का पालन करने वाला नागरिक नहीं है, वह गलत पते पर कंपनियां चलाता है और यदि रिहा हुआ तो अदालत में पेश नहीं होगा फरार हो सकता है। सरकार ने यह भी कहा कि गुजरात में पहले ही गिरफ्तारी मेमो बन चुका था, इसलिए दोबारा बनाने की जरूरत नहीं थी।

कोर्ट ने इन दलीलों को अस्वीकार करते हुए कपिल चुघ की गिरफ्तारी, हिरासत और रिमांड को अवैध एवं असंवैधानिक घोषित कर दिया और उन्हें तत्काल रिहा करने का आदेश दिया। हालांकि, न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सरकार कानून के अनुसार नए सिरे से कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र हैं।