शंकराचार्य आधुनिक लोकतंत्र में प्रासंगिक : मुरली माधवन

—बीएचयू में संस्कृत साहित्य में लोकतांत्रिक मूल्यों पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन

शंकराचार्य आधुनिक लोकतंत्र में प्रासंगिक : मुरली माधवन

वाराणसी, 03 फरवरी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग, कला संकाय एवं वैदिक दर्शन विभाग, संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय संगोष्ठी के दूसरे दिन मंगलवार को वक्ताओं ने संस्कृत साहित्य में लोकतांत्रिक मूल्यों को बताया।

विश्वविद्यालय के वैदिक विज्ञान केन्द्र में चल रहे संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि प्रो.एस. एन. संखवार (निदेशक, चिकित्सा विज्ञान संस्थान, बीएचयू) ने संस्कृत परंपरा में निहित लोकतांत्रिक मूल्यों, नैतिक एवं मानवीय मूल्यों की वर्तमान वैश्विक संदर्भों में प्रासंगिकता को बताया। उन्होंने कहा कि जनक की सभा में गार्गी का प्रश्न स्त्री सशक्तिकरण और विदुर नीति में राजा के कर्तव्यों का वर्णन प्राप्त हैं। बतौर मुख्य वक्ता प्रोफेसर पी. सी. मुरली माधवन (निदेशक, केरल) ने उपनिषदों मे वर्णित महावाक्य पर आचार्य शंकर के वचनों को वर्तमान लोकतंत्र में प्रासंगिकता को बताया।

वेदों का महात्म्य बताते हुए उन्होंने कहा कि श्यस्य निश्वसितो वेदाः’’ अर्थात वेद जिसकी श्वास हैं। प्रतिपादित करने के अनन्तर उपनिषदों का महात्म्य प्रतिपादित कर उपनिषदों में वर्णित जीवनशैली साधारण जीवन और उच्च चिन्तन हमारी वैदिक साधन तत्व प्राप्ति की यात्रा का प्रथम चरण है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य आधुनिक लोकतंत्र में प्रासंगिक है। प्रश्न है कि तत्वमसि इस महावाक्य में समूह का ग्रहण नहीं हैं। फिर कैसे हम लोक तंत्र का ग्रहण करेंगें। अपने शोधपत्र के निष्कर्ष में उन्होंने कहा कि गीता में क्षेत्र क्षेत्रज्ञ के रूप वर्णित हैं।

गोष्ठी की अध्यक्षता प्रो. राजाराम शुक्ल (संकाय प्रमुख, संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय) ने की। संगोष्ठी में डॉ बालमुकुंद पाण्डेय (संगठन सचिव, अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना, दिल्ली), प्रो. अंबिकादत्त शर्मा (प्रतिनिधि,इंडियन कौंसिल आफ फिलोस्फिकल रिसर्च) ने भी अपने विचार साझा किए। संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र का संचालन प्रोफेसर शरदिंदु कुमार त्रिपाठी, मंगलाचरण वेंकटेश मिश्र ने प्रस्तुत किया । विषय प्रवर्तन डॉ. दिव्या भारती (सहायक आचार्या, संस्कृत विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय),विषय प्रवर्तन डॉ. दिव्या भारती (सहायक आचार्या, संस्कृत विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय),स्वागत वक्तव्य प्रोफेसर सदाशिव कुमार द्विवेदी (विभागाध्यक्ष, संस्कृत विभाग, बीएचयू) तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर धनंजय कुमार पांडेय(पूर्व विभागाध्यक्ष, वैदिक दर्शन विभाग बीएचयू) ने किया। सम्मेलन में देश-विदेश से आए विद्वान, शोधार्थी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।