बिना सुनवाई एटीवीएम फैसिलिटेटर का चयन निरस्त करना रेलवे को पड़ा भारी
बिना सुनवाई एटीवीएम फैसिलिटेटर का चयन निरस्त करना रेलवे को पड़ा भारी
प्रयागराज, 29 मई । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर मध्य रेलवे द्वारा एटीवीएम फैसिलिटेटर रोहित सोनी का चयन निरस्त किए जाने के मामले में अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि यदि किसी आदेश से संबंधित व्यक्ति की छवि पर धब्बा लगता है तो उसके खिलाफ आदेश पारित करने से पहले सुनवाई का अवसर देना आवश्यक है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने रोहित सोनी की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। याची की ओर से अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि 27 अप्रैल 2026 को सहायक वाणिज्य प्रबंधक- कोचिंग, नॉर्थ सेंट्रल रेलवे ने रोहित सोनी का एटीवीएम फैसिलिटेटर के रूप में अनुबंध बिना कारण बताओ नोटिस और बिना सुनवाई के तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया। साथ ही 50 हजार रुपये की सुरक्षा धनराशि भी जब्त कर ली गई।
याचिका में आरोप लगाया गया कि रेलवे प्रशासन ने एकतरफा और दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई करते हुए प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन किया है। वहीं रेलवे प्रशासन की ओर से अदालत में कहा गया कि मामले में सक्षम अधिकारी को याची की शिकायत पर विचार करने का निर्देश दिया जा सकता है।
रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि विवादित आदेश याची के खिलाफ “कलंक” उत्पन्न करता है, इसलिए आदेश पारित करने से पहले सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए था। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना याचिका का निस्तारण करते हुए याची को एक माह के भीतर सहायक वाणिज्य प्रबंधक, उत्तर मध्य रेलवे, प्रयागराज के समक्ष नया प्रत्यावेदन देने की अनुमति दी। साथ ही निर्देश दिया कि सक्षम अधिकारी याची को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर देकर एक माह के भीतर कानून के अनुसार निर्णय लें।