प्रयागराज : गौवंश संरक्षण को आधुनिक तकनीक और जनसहभागिता पर विशेष जोर
प्रयागराज : गौवंश संरक्षण को आधुनिक तकनीक और जनसहभागिता पर विशेष जोर
प्रयागराज, 28 मई। गौवंश संरक्षण और गौ आश्रय स्थलों को सुदृढ़ बनाने के लिए पशुपालन विभाग द्वारा व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। इस योजना के तहत गौआश्रय स्थलों की आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने, विभागीय समन्वय बढ़ाने, जनसहभागिता सुनिश्चित करने और आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर विशेष बल दिया जा रहा है। यह जानकारी देते हुए गुरुवार को
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. शिवनाथ यादव ने बताया कि गौवंश संरक्षण केवल सरकारी दायित्व नहीं बल्कि सामाजिक सहभागिता का भी विषय है।
उन्होंने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप गौआश्रय स्थलों को बेहतर सुविधाओं से युक्त बनाया जा रहा है ताकि गौवंश को सुरक्षित और व्यवस्थित वातावरण मिल सके।
उन्होंने बताया कि गौआश्रय स्थलों में अतिरिक्त शेड निर्माण, हरे चारे एवं चारा कटाई मशीनों की व्यवस्था, गोबर एवं अपशिष्ट प्रबंधन, विद्युत एवं प्रकाश व्यवस्था तथा अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। इसके साथ ही पशुओं के लिए स्वच्छ पेयजल और नियमित स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था भी प्राथमिकता पर है।
डॉ. यादव ने कहा कि पशुपालन विभाग, कृषि विभाग, सिंचाई विभाग, पंचायती राज विभाग और राजस्व विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर गो संरक्षण कार्यों को प्रभावी बनाया जा रहा है। कृषि विभाग द्वारा चारा उत्पादन और गोचर भूमि की उपलब्धता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि जनसहभागिता बढ़ाने के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं, स्थानीय किसानों और सामाजिक संगठनों को भी अभियान से जोड़ा जा रहा है। सीएसआर के माध्यम से चारा एवं जल व्यवस्था तथा दान आधारित भूसा संग्रह अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने कहा कि आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की गई है। इसके तहत बेसहारा गौवंश की पहचान, सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरण, मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों की तैनाती और जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष की स्थापना की गई है।
उन्होंने बताया कि गौसंरक्षण कार्यों में आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया जा रहा है। जीपीएस और जीआईएस आधारित गोचर भूमि प्रबंधन, मोबाइल चारा बैंक, हाइड्रोपोनिक ग्रीन फोडर यूनिट, बायोगैस एवं जैविक खाद इकाइयों तथा सोलर ऊर्जा आधारित जल पंप जैसी व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं।
डॉ. शिवनाथ यादव ने विश्वास जताया कि इन प्रयासों से गौआश्रय स्थलों की व्यवस्थाएं और बेहतर होंगी, पशु मृत्यु दर में कमी आएगी तथा गौवंश संरक्षण को स्थायी और प्रभावी स्वरूप मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि स्वस्थ गौवंश, समृद्ध समाज और सुरक्षित भविष्य की दिशा में यह अभियान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।