बिना नोटिस पुलिस किसी को अपराध की विवेचना में पूछताछ के लिए नहीं बुला सकती: हाईकोर्ट
बिना नोटिस पुलिस किसी को अपराध की विवेचना में पूछताछ के लिए नहीं बुला सकती: हाईकोर्ट
प्रयागराज, 18 मई । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि यह स्थापित विधि सिद्धांत है कि विवेचना या पूछताछ के लिए किसी सम्भावित अभियुक्त या व्यक्ति को बुलाना जरूरी हो तो बी एन एस एस की धारा 35 का नोटिस देना अनिवार्य है। बिना नोटिस पुलिस किसी को थाने में पूछताछ के लिए नहीं बुला सकती।
यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव मिश्र तथा न्यायमूर्ति पद्म नारायण मिश्र की खंडपीठ ने थाना सोनौली, महाराजगंज की ज्ञानमती व अन्य की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है।
याचिका पर अधिवक्ता का कहना था कि उसके बेटे हरिश्चंद्र के खिलाफ शिकायतकर्ता ने लड़की भगा ले जाने का आरोप लगाते हुए 20 जनवरी 26 को राहुल दिवाकर ने एफआईआर दर्ज की है। याची एफआईआर में नामित नहीं है फिर भी पुलिस याची को बार बार थाने बुलाकर धमकाती व परेशान करती है, जो उसके जीवन स्वतंत्रता के अनुच्छेद 21 के मूल अधिकारों का उल्लंघन है।
याची अधिवक्ता का कहना था कि राज्य व वरिष्ठ अधिकारियों का दायित्व है कि वह नागरिक अधिकारों का संरक्षण करें। इसलिए सरकार को कानून के खिलाफ काम करने वाले पुलिस अधिकारियों के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही करने का निर्देश दिया जाय। कोर्ट ने कहा कि बिना नोटिस पुलिस याची को थाने न बुलाए।
---------------