दोहरे हत्याकांड के आरोपित की उम्रकैद की सजा बरकरार
दोहरे हत्याकांड के आरोपित की उम्रकैद की सजा बरकरार
प्रयागराज, 20 मार्च । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वाराणसी के एक चर्चित दोहरे हत्याकांड मामले में आरोपित महेश उर्फ मुन्ना यादव की दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है।
यह आदेश न्यायमूर्ति चंद्र धारी सिंह एवं न्यायमूर्ति देवेंद्र सिंह प्रथम की खंडपीठ ने सत्र न्यायालय वाराणसी के 27 जून 2016 के फैसले की पुष्टि करते हुए दिया है। सेशन कोर्ट ने अपीलार्थी को आईपीसी की धारा 302 और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया था।
मामले के तथ्यों के अनुसार 16 मार्च 2014 की रात वाराणसी के भेलूपुर थानाक्षेत्र के महमूरगंज इलाके में भूमि विवाद को लेकर हुई गोलीबारी में भोला यादव और विनोद यादव की मृत्यु हो गई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार घटना की रात आरोपित अपने साथियों के साथ भोला यादव के घर पहुंचा और जमीन के विवाद को लेकर गाली-गलौज शुरू कर दी। भोला यादव ने इसका विरोध किया तो अन्य सह अभियुक्तों के उकसाने पर महेश उर्फ मुन्ना यादव ने पिस्टल से अंधाधुंध फायरिंग की। फायरिंग में भोला यादव व बीच बचाव करने आए विनोद यादव को गंभीर चोटें आईं और अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस ने घटना के अगले ही दिन एफआईआर दर्ज की और विवेचना के दौरान आरोपित के पास से हत्या में प्रयुक्त पिस्टल और कारतूस बरामद किए।
अपीलार्थी के अधिवक्ता ने अपनी बहस में कहा कि चश्मदीद गवाह मृतक के परिजन थे। वे बयानों से मुकर गए हैं और उन्हें पक्षद्रोही घोषित किया गया है। यह भी तर्क दिया कि दोनों मृतकों के शरीर पर मिले घावों के आकार अलग-अलग थे, जो दो अलग-अलग हथियारों के इस्तेमाल की ओर इशारा करते हैं।
कोर्ट ने इन तर्कों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि अन्य साक्ष्य विश्वसनीय हों तो केवल गवाहों के मुकरने से पूरा मामला खत्म नहीं हो जाता। कोर्ट ने फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की रिपोर्ट पर भरोसा जताया, जिसने पुष्टि की थी कि मौके से बरामद खाली कारतूस आरोपित से जब्त की गई पिस्टल से ही चलाए गए थे। कोर्ट ने कहा कि घटना के तुरंत बाद दर्ज कराई गई एफआईआर किसी भी तरह की साजिश की संभावना को खत्म करती है। साथ ही आरोपित का पुलिस को देखकर भागने का प्रयास करना और उसके पास से हथियार की बरामदगी भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 8 के तहत मजबूत परिस्थितिजन्य साक्ष्य है। कोर्ट ने माना कि भूमि विवाद के रूप में हत्या का मकसद पूरी तरह स्थापित था। इन तथ्यों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने अपील खारिज कर दी और कहा कि अभियुक्त जेल में अपनी शेष सजा काटेगा।