स्टाफ की कमी के बावजूद शासकीय अधिवक्ता, महाधिवक्ता कार्यालय में खाली पदों को न भरने पर कोर्ट गंभीर

--विधि सचिव से मांगा जवाब, सुनवाई 30 मार्च को

स्टाफ की कमी के बावजूद शासकीय अधिवक्ता, महाधिवक्ता कार्यालय में खाली पदों को न भरने पर कोर्ट गंभीर

प्रयागराज, 20 मार्च । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्रयागराज व लखनऊ शासकीय अधिवक्ता-महाधिवक्ता कार्यालय में स्टाफ की कमी के बावजूद खाली पदों को भरने में उदासीनता को लेकर तीखी टिप्पणी की है।

कोर्ट ने कहा 27 जनवरी 2023 से 26 फरवरी 2026 तक राज्य सरकार ने महाधिवक्ता कार्यालय से रिक्तियों की स्थिति की कई बार जानकारी मांगी, किंतु उसका कोई जवाब नहीं दिया गया। जिसके चलते खाली पद भरने की कार्यवाही नहीं हो पा रही है।

कोर्ट ने इस स्थिति को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए नाखुशी जताई और कहा कि कोर्ट में न तो महाधिवक्ता पक्ष रखने के लिए उपस्थित हैं और न ही कोई अपर महाधिवक्ता। हालांकि मुख्य स्थाई अधिवक्ता मनोज कुमार सिंह ने कोर्ट को बताया की सरकार की तरफ से इस केस में अपर महाधिवक्ता एम सी चतुर्वेदी पक्ष रखेंगे। कोर्ट ने सरकार से उचित हलफनामा मांगा है और अपर महाधिवक्ता चतुर्वेदी को अगली सुनवाई की तिथि 30 मार्च को पक्ष रखने को कहा है।

यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार तथा न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने सूबेदार यादव की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है। याचिका पर अधिवक्ता आशीष मल्होत्रा ने बहस की। इससे पहले कोर्ट ने 26 फरवरी को सरकार से स्टाफ की कमी पूरा करने पर जानकारी मांगी थी। कहा था सचिव जवाबी हलफनामा दाखिल करें। कोर्ट ने कहा पद भारी संख्या में खाली है किन्तु भरने की कार्यवाही नहीं की जा रही है।इसी तरह से कपिल कुमार केस में 2023 में कोर्ट ने पूछा था कि भर्ती क्यों नहीं की जा रही है। कोई कारण नहीं बताया गया।

महाधिवक्ता ने आश्वासन दिया था कि भर्ती प्रक्रिया शुरू करेंगे। सचिव का हलफनामा दाखिल नहीं किया गया, मुख्य स्थाई अधिवक्ता ने समय मांगा और सरकार से मिली जानकारी पेश की। जिसमें खुलासा हुआ कि सरकार महाधिवक्ता से रिक्ति की स्थिति की जानकारी माग रही है किन्तु कोर्ट से जवाब नहीं आ रहा। फिलहाल कोर्ट ने कहा यदि हलफनामा दाखिल नहीं किया गया तो कोर्ट इसे गंभीरता से लेगी। याचिका की सुनवाई 30 मार्च को होगी।