संदेह का लाभ : 46 साल पुराने फा यरिंग मामले में आरोपित बरी
संदेह का लाभ : 46 साल पुराने फा संदेह का लाभ : 46 साल पुराने फा यरिंग मामले में आरोपित बरी
प्रयागराज, 27 अप्रैल । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने लगभग 46 साल पुराने फायरिंग मामले में आरोपित को सबूतों की कमी के कारण बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष संदेह से परे आरोप साबित करने मे सफल नहीं हो सका, इसलिए आरोपित को संदेह का लाभ दिया जाना उचित है।
यह मामला 04 दिसम्बर 1980 का है, जब मैनपुरी जिले के एक गांव में जमीनी विवाद को लेकर गोली चलने की घटना हुई थी। आरोप था कि केशव सिंह उर्फ कल्लू ने अपने पिता बृजबासी लाल के उकसाने पर फायरिंग की। जिसमें शिव कुमार सिंह घायल हो गए थे। निचली अदालत ने 26 जून 1987 को आरोपित को दोषी ठहराते हुए तीन साल की सजा और पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया था।
अपील के दौरान मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पाया कि गवाहों के बयान एक-दूसरे से मेल नहीं खाते थे और घटनास्थल से जुड़े कई महत्वपूर्ण साक्ष्य भी एकत्र नहीं किए गए थे। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि कथित हथियार को जब्त नहीं किया गया और न ही खून से सने कपड़े या अन्य जरूरी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए, जिससे अभियोजन की कहानी कमजोर हो गई।
न्यायालय ने कहा कि गवाहों के बयानों में समय, स्थान और घटना के तरीके को लेकर गंभीर विरोधाभास हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं हो सका कि घायल और चश्मदीद गवाह घटनास्थल पर क्यों मौजूद थे। इन परिस्थितियों में अदालत ने माना कि आरोपित के खिलाफ ठोस और निर्णायक साक्ष्य नहीं हैं।
इन्हीं आधारों पर हाईकोर्ट ने 1987 में दी गई सजा और दोषसिद्धि को रद्द करते हुए आरोपित केशव सिंह उर्फ कल्लू को धारा 307 आईपीसी के आरोप से बरी कर दिया। साथ ही अदालत ने आपराधिक अपील को स्वीकार करते हुए आरोपित की जमानत और जमानतदारों को भी मुक्त करने का आदेश दिया।